blogid : 316 postid : 1355331

ऐसा कवि जो सरकार को जनता का डर दिखाकर सिंहासन खाली करने को कहता है

Posted On: 23 Sep, 2017 Social Issues में

Pratima Jaiswal

  • SocialTwist Tell-a-Friend

‘सिंहासन खाली करो कि जनता अभी आती है’. हिन्दी कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कालजयी रचना, जिसे आज भी लोकतंत्र और जनता की शक्ति के रूप में परिभाषित किया जाता है. इसकी एक मिसाल 70 के दशक में संपूर्ण क्रांति के दौर में मिलती है. दिल्ली के रामलीला मैदान में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने हजारों लोगों के सामने दिनकर की ये पंक्ति ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ का उद्घोष करके तत्कालीन सरकार के खिलाफ विद्रोह का आगाज किया था. दिनकर की विद्रोह से भरी हुई कविताएं आज भी समाज और राजनीतिक व्यवस्था पर कटाक्ष है.

dinkar

हमारे देश में किसानों की दशा को हर कोई जानता है. बीते दिनों किसानों की कर्जमाफी के नाम पर उनसे भद्दा मजाक किया गया. 1 से लेकर 9 पैसों तक का चेक उन्हें थमा दिया गया था. ऐसे में दिनकर किसानों की दशा पर जो लिख गए हैं, वो वर्तमान परिदृश्य में सटीक बैठता है.

हमारे कृषक

जेठ हो कि हो पूस, हमारे कृषकों को आराम नहीं है

छूटे कभी संग बैलों का ऐसा कोई याम नहीं है

मुख में जीभ शक्ति भुजा में जीवन में सुख का नाम नहीं है

वसन कहां? सूखी रोटी भी मिलती दोनों शाम नहीं है

बैलों के ये बंधू वर्ष भर क्या जाने कैसे जीते हैं

बंधी जीभ, आँखें विषम गम खा शायद आँसू पीते हैं

पर शिशु का क्या, सीख न पाया अभी जो आँसू पीना

चूस-चूस सूखा स्तन माँ का, सो जाता रो-विलप नगीना

आज रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जन्मदिन है.  दिनकर ने आजादी की लड़ाई में अपना योगदान दिया था. वो महात्मा गांधी को बहुत मानते थे. दिनकर सिर्फ हिन्दी ही नहीं बल्कि उर्दू, संस्कृत, मैथिली और अंग्रेजी भाषा के भी जानकार थे.

Read More :

इनकी मौत पर नहीं था कोई रोने वाला,पैसे देकर बुलाई जाती थी रुदाली

नींद के सौदागर करते हैं 30 रुपए और एक कम्बल में इनकी एक रात का सौदा

एक वेश्या की वजह से स्वामी विवेकानंद को मिली नई दिशा



Tags:                 

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 2.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashwinijaiswal के द्वारा
September 23, 2017

प्रतिमा जी का लेख किसानो के कवि श्री राम धारी सिंह दिनकर के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर समयानुकूल है .अब समय आ गया है कि सरकार चेत जाये .


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran