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जिन गलियों को समाज बदनाम कहता है, वहां की मिट्टी से बनती है मां दुर्गा की प्रतिमा

Posted On: 21 Sep, 2017 Social Issues में

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उसे अंधेरा पसंद नहीं था लेकिन यह जगह ऐसी थी जहां दिन-रात का पता ही नहीं चलता था. बचपन की धुंधली पड़ चुकी यादों में से उसे बस इतना ही याद है कि जब भीड़ में किसी अंजान मर्द का गलती से भी उसे स्पर्श होता था तो घर में आकर न जाने कितने घड़ों पानी से वो नहा लिया करती थी. सौतेली मां के पूछने पर कहती थी ‘मैं गिर गई थी इसलिए खुद को साफ कर रही थी’ लेकिन यहां तो उसे ये भी याद नहीं है कि वो कितने गैर मर्दों साथ हमबिस्तर हुई है. अब उससे ये सवाल किया जाता है कि आज दिन भर में कितने ग्राहकों को निपटा दिया. रेड लाइट एरिया में लाई गई ऐसी न जाने कितनी ही लड़कियों की आप-बीती इस कहानी से मिलती-जुलती या इससे भी अधिक रोंगटे खड़े कर देने वाली हो सकती है लेकिन उनके लिए यह बदनाम जगह अब घर बन चुकी है और अब उन्हें बाहर की दुनिया से कोई फर्क नहीं पड़ता. लेकिन फिर भी इनकी बातों से ऐसा लगता है कि आजादी की दबी-कुचली हल्की सी उम्मीद अभी भी इनके मन में कहीं धुल में लिपटी हुई पड़ी है.


durga ma

ऐसे में इनके प्रति समाज की उपेक्षा के बारे में तो हर कोई जानता है लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या रेडलाइट एरिया में काम करने वाली लड़कियों, जिनमें से अधिकतर को जबरन धकेला जाता है, उन्हें क्या इंसान मानना भी गलत है? इस विषय पर ना जाने कितने दशकों से बहस हो रही है, लेकिन नवरात्रि की सदियों पुरानी पंरपरा में इसका जवाब मिलता है. जिसमें वेश्यालय की मिट्टी से दुर्गा माता की प्रतिमा बनाई जाती है.


durga pooja


वेश्यालय की मिट्टी के पीछे छुपा संदेश

‘निषिद्धो पाली’ वेश्याओं के घर या क्षेत्र को कहा जाता है. कोलकाता का कुमरटली इलाके में भारत की सर्वाधिक देवी प्रतिमा का निर्माण होता है. वहां निषिद्धो पाली के रज के रूप में सोनागाछी की मिट्टी का इस्तेमाल होता है. सोनागाछी का इलाका कोलकाता में देह व्यापार का गढ़ माना जाता है. तन्त्रशास्त्र में निषिद्धो पाली के रज के सूत्र काम और कामना से जुड़े हैं.

कामना को दैहिक सुख से भी जोड़कर देखा जाता है. साथ ही दुर्गा सभी तरह की असमानताओं को मिटाकर हर जीव को स्वीकार करने वाली है. इस कारण वेश्या भी एक जीव, इंसान ही है, जिसका निर्माण ईश्वर ने किया है. इसके अलावा अध्यात्म में कामचक्र को ही कामना का आधार माना जाता है. यदि काम से जुड़े विकारों को दुरुस्त कर लिया जाए और ऊर्जा प्रबंधन ठीक कर लिया जाए तो भौतिक कामनाओं की पूर्ति का मार्ग सहज हो जाता है.

दुर्गा को सामाजिक सुधार की देवी भी माना जाता है. …Next


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