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अब ये मत कहना ‘हिन्दी को कोई सुनता नहीं!’ गूगल ने भी माना हिन्दी में है दम

Posted On: 14 Sep, 2017 Social Issues में

Pratima Jaiswal

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‘हिन्दी में जो बात है वो अंग्रेजी में कहां? हिन्दी में जज्बात है इसलिए हिन्दी इतनी खास है’. आज हिन्दी दिवस है इसलिए तारीफ तो बनती ही है. चाहे बाकी दिन आप हिन्दी की कितनी ही उपेक्षा क्यों ना करें लेकिन आज हिन्दी की तारीफ  होनी ही चाहिए. है ना? चलिए ये तो बात हुई मानसिकता की. अब बात करते हैं असल में हिन्दी की स्थिति की.


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सबसे पहले तो हिन्दी भाषी देश में, हिन्दी दिवस मनाए जाने की जरूरत होना, कितना अखरता है!  आप खुद समझ सकते हैं. बीते दशकों में अंग्रेजी का बोलबाला कुछ ज्यादा ही बढ़ गया. जिसका खामियाजा हिन्दी को भुगतना पड़ा. आप हिन्दी में बोलते हैं, तो कमतर समझे जाते हैं. अंग्रेजी आते हुए हिन्दी में लिखते हैं तो भी आपको कम पढ़ा लिखा समझ लिया जाता है?

ऐसी मानसिकता पूरी तरह बदली तो नहीं है लेकिन सुधार जरूर हुआ है. अब हिन्दी वापसी कर रही है. हिन्दी को प्रोत्साहन मिल रहा है. सोशल मीडिया पर हिन्दी लिखने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. कमाल की बात ये है कि इनमें से ज्यादातर युवा है.


फेसबुक पर हिन्दी लिखने वालों की संख्या बढ़ी

जब फेसबुक की शुरूआत हुई थी तो लोग सिर्फ फोटो अपलोड करते थे. लाइक और कमेंट की होड़-सी मची हुई थी. लोग ईटिंग डिनर विद फलां, ट्रैविल मसूरी विद फैमिली वगैरह-वगैरह स्टेटस डालकर आत्ममुग्ध हो जाते थे. लेकिन कुछ सालों में फेसबुक पर लोग लेख लिखने लगे हैं. ट्विटर और दूसरी सोशल साइट्स पर हिन्दी पर लिखने लगे हैं. मुद्दों, विचारधारा पर लिखकर बात होने लगी है. इसका सबसे बड़ा श्रेय जाता है गूगल इटपुट टाइपिंग को. जिसने हिन्दी में लिखना और भी आसान बना दिया है.


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मोबाइल में हिन्दी लिखना हुआ आसान

एंड्रायड फोन में हिन्दी टाइपिंग के काफी आसान विकल्प है. ज्यादातर मोबाइल में किसी हिन्दी एप की जरूरत नहीं है. फिर भी किसी  मोबाइल अगर ये  विकल्प उपलब्ध नहीं है, उनमें ‘जस्ट हिन्दी’ जैसे एप डाउनलोड किए जा सकते हैं.


हिन्दी वेब पोर्टल की बहार

कुछ सालों पहले तक हिन्दी की कुछ गिनी-चुनी साइट्स ही उपलब्ध थी, लेकिन हिन्दी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कहानियों, कविताओं, लेख आदि से सम्बधित कई पोर्टल शुरू हो चुके हैं. जिनमें हिन्दी लेखकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है.



गूगल सर्च अब हिन्दी में भी

हिन्दी की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, गूगल सर्च इंजन में अब हिन्दी में कुछ भी सर्च कर सकते हैं. आप हिन्दी में बोलकर कुछ भी चीज सर्च कर सकते हैं.

सच तो ये है कि ‘हिन्दी दिवस’ नहीं बल्कि ‘हिन्दी’ को हमेशा याद रखना चाहिए. जरा सोचिए, हम में से ज्यादातर लोगों ने बचपन में सबसे पहले हिन्दी में बोलने से ही तो शुरूआत की थी, वो भी तोतली आवाज में…Next


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