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घर बड़ा होता जा रहा है और दिल छोटा!

Posted On: 31 Aug, 2017 Social Issues में

Pratima Jaiswal

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सड़क या मेट्रो जब कभी किसी बुर्जुग को भीख मांगते या बेसहारा घूमते देखती हूं, तो मन में रह-रहकर ख्याल आता है कि आखिर इस उम्र में इन्हें इस तरह से क्यों छोड़ दिया गया. हम इतने आधुनिक कब हो जाते हैं, जब हमें अपने माता-पिता बोझ लगने लगते हैं? आलीशान महल में इतनी भी जगह नहीं होती कि अपने माता-पिता को एक कमरा भी दे सकें, उन्हें वृद्ध आश्रम का रूख क्यों करना पड़ता है? आए दिन ऐसी घटनाएं सुनने को मिलती है जब किसी बुर्जुग को यातना देकर किसी वृद्ध आश्रम भेज दिया जाता है.


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मुंशी प्रेमचंद की लिखी हुई कहानी ‘बूढ़ी काकी’ , कहानी में बूढ़ी काकी की मनोस्थिति को चित्रित किया गया है. जिसमें वो रोज बच्चों की तरह जिद करती है पर उन्हें सुनने वाला कोई नहीं है. दुनियाभर के आडंबर और खोखले रीति-रिवाजों को महत्व देते हुए घर के लोग एक जीते-जागते इंसान बूढ़ी काकी को अनदेखा करते हैं.


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कहानी के अंत में अपने किए का पछतावा करते हुए बूढ़ी काकी की बहू खुद को कोसने पर मजबूर हो  जाती है. वहीं कहानी का अंत पढ़ते हुए हम में से अधिकतर लोगों की आंखें नम जरूर हुई होगी लेकिन बातों को पढ़कर भूल जाना हमारी आदत बन चुकी है,  इसलिए ऐसे संदेशों को चंद पलों में भूल जाने में ही हम अपनी भलाई समझते हैं. आपने कभी  गौर किया होगा जाने-अनजाने कई लोग बस, दुकान, कैंटीन, मेट्रो या फिर यूं ही  किसी सड़क पर मिलते हैं और जान पहचान हो जाती है ऐसे में किसी एक दिन भी न मिल पाने की सूरत में अगले दिन मिलने पर हम उस शख्स की खैरियत जरूर मालूम करते हैं तो जरा सोचिए कुछ दिनों में ही हमें राह चलते अजनबियों से इतना जुड़ाव हो जाता है तो फिर हमारे अपने बड़ों के लिए हमारे पास वक्त क्यों नहीं है या फिर वक्त की अंधी दौड़ में हमें अपने एक मोबाइल फोन खो जाने का डर तो है लेकिन  हमने कभी उनके खोने की कल्पना तक नहीं की होती. क्योँकि किसी इंसान को  खोने के डर से ही हमारा उस व्यक्ति कर प्रति लगाव बढ़ता है. तो खुद में उनके  खो जाने या दूर जाने का डर जगाइए.


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कल्पना कीजिए एक पल के लिए और याद कीजिए बचपन में उनके साथ बिताई खुशनुमा यादों को उसके बाद आपको उनके अकेलेपन का अनुभव होगा. आपके और उनके बीच जो भी मतभेद है एक बार सब कुछ भुलाकर उन्हें गले से लगाकर तो देखिए, क्या पता उनसे गले लगते ही मन की कितनी ही गाठें ढीली पड़ जाए और आपको एक दोस्त और मिल जाए. वो दोस्त जो आपको जन्म के पहले दिन से जानता है या फिर आपसे उम्र और अनुभव में बड़ा होकर भी आज भी दिल से बच्चा है. तो क्यों न दिन इन नए दोस्तों के करीब आने की शुरुआत आज से ही शुरू कर दें. ..Next


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