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मार्केट में नए ‘भगवान’ तो आते रहते हैं लेकिन ‘भक्त’ वही सदियों पुराने!

Posted On: 25 Aug, 2017 Social Issues में

Pratima Jaiswal

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‘आस्था’ और ‘अंधविश्वास’ में बस एक लकीर का अंतर है,जिसने भी इस लकीर को जान लिया, वो अंधविश्वास को लांघने से बच जाता है और जिसने इस लकीर को अनदेखा किया, वो लकीर का फकीर बन गया. बाबा गुरमीत राम रहीम भगवान से स्टार भी बने, धड़ाधड़ फिल्में रिलीज की. अपने भक्तों को फिल्म में शामिल करके कई रिकॉर्ड भी अपने नाम किए. लेकिन यहां ये बात समझने वाली होगी कि बाबा को भगवान और स्टार बनाया किसने? ये कौन लोग हैं! जो बाबा को यौन शोषण के आरोप में जेल जाते हुए नहीं देख सकते? ये कौन लोग हैं! जो बाबा की गाड़ी के आगे लेट जाते हैं?


baba and bhakt

बेशक, ये उन्हीं लोगों की भीड़ है जो किसी बच्चे में शारीरिक विकार होने को उसे देवता या भगवान बना देते हैं. किसी का चेहरा किसी रोग की वजह से सामान्य नहीं है, तो उसका ईलाज करवाने की बजाय उसकी चौकी लगा देते हैं.


हर तरफ बंद-बंद

बाबा के ऐसे अंधभक्तों की वजह से हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में हर तरफ बंद ही बंद हो गया. इंटरनेट सेवा बंद, स्कूल, कॉलेज, दुकान, पेट्रोल बिक्री पर पाबंदी के अलावा कर्फ्यू जैसा माहौल देखने को मिल रहा है. बताया जा रहा है कि जैसे ही सिरसा के अपने आश्रम से राम रहीम पंचकूला जाने के लिए निकले, उनके समर्थक गाड़ियों के आगे आकर सड़क पर लेट गए. उनका कहना था कि वे राम रहीम को कहीं नहीं जाने देंगे. समर्थकों का आरोप है कि बाबा को इस केस में साजिश के तहत फंसाया गया है. बाद में सड़क पर लेटे समर्थकों को समझाकर किनारे किया गया और तब राम रहीम का काफिला आगे बढ़ सका.


baba


मार्केट में हर साल नए बाबा आते हैं

अतीत में झांककर देखें तो पाएंगे, ये पहला मौका नहीं है जब किसी बाबा की फैन फॉलोइंग इतनी ज्यादा है. अभी बहुत समय नहीं बीता जब आसाराम बापू के समर्थकों ने पुलिस और प्रशासन की नाक में दम कर रखा था. कितने ही ऐसे बाबा हुए हैं जिनपर यौन शोषण और हत्या का आरोप लग चुका है, जिनमें से कुछ बच गए तो कुछ बचा लिए गए. लेकिन यहां सोचने वाली बात ये है कि इन बाबाओं से ज्यादा गलती इनके भक्तों की हैं, जिन्होंने हर ‘भगवाधारी’ को भगवान बना दिया है. कोई भी एक-दो चमत्कार दिखा देगा और हम उन्हें भगवान और दिव्य पुरूष बना देंगे.


baba 1



सोचने वाली बात है

जरा सोचिए, हम कितनी ही बार ऐसी खबरें सुनते हैं जब किसी युवती को ठीक करने के लिए उसके घरवाले उसे बाबा के आश्रम में अकेले भेज देते हैं. उसके बाद कुछ ही वक्त में यौन शोषण और रेप की खबर आती है. ये वही लोग हैं जो अपनी लड़की को अकेले घर से बाहर जाने नहीं देते, किसी लड़के से बात तक नहीं करने देते. उन्हें सिर्फ भरोसा है तो बाबा की बूटी पर.

बड़ी ही शर्मनाक बात है कि आज हमारा समाज उस रेप की शिकार हुई महिला के साथ नहीं बल्कि रेप का आरोप लगे एक बाबा के साथ खड़ा है. ऐसी भीड़ जिन्हें अपनी आस्था के लिए दिमाग के ऑपरेशन की जरूरत है. …Next




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