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किसी के पहनावे की वजह से खतरे में क्यों पड़ जाते हैं संस्कार?

Posted On: 23 Aug, 2017 Social Issues में

Pratima Jaiswal

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बीते दिनों ईशा गुप्ता ने सोशल मीडिया पर अपनी कुछ बोल्ड फोटो शेयर की. जिसके बाद से सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा. सबसे खास बात ये कि उन्हें ट्रोल किए जाने में सबसे आगे पुरूष थे, जो उन्हें संस्कारों की दुहाई दे रहे थे. आपको जानकर हैराने होगी जहां एक तरह लोग ईशा को संस्कारों का पाठ पढ़ा रहे थे, वहीं दूसरी तरह उन्हें गालियों से नवाजकर वो अपने संस्कारों की नुमाइंश कर रहे थे.

इन सबको देखते हुए ईशा हताश नहीं हुई और उन्होंने ट्रोलर्स को मुंह-तोड़ जवाब देते हुए और भी ज्यादा बोल्ड फोटो शेयर कर दी. इन सबके बीच एक बात सोचने वाली है कि अगर कोई कुछ भी पहनता है तो उससे संस्कारों पर आंच कैसे आ सकती है? क्या हमारी सभ्यता इतनी कमजोर है, जो साड़ी से बिकनी पहन लेने पर खतरे में पड़ जाएगी?


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बुर्के में रेप नहीं होता?

हमारे देश में जब भी किसी लड़की का यौन शोषण या रेप होता है, तो सबसे पहले उसके कपड़ों और तौर-तरीकों पर जरूर बयानबाजियां सुनने को मिलती है. लेकिन ऐसी सोच रखने वाले लोगों से एक सवाल है कि क्या बुर्का या सलवार-कमीज पहनने वाली महिलाओं के साथ कभी ऐसी वारदातें नहीं हुई?

रेप होता है महिलाओं को उपभोग की वस्तु समझने वाली मानसिकता से, जिनका कपड़ों से कोई रिश्ता नहीं है.


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आप शर्ट से टी-शर्ट या स्कर्ट से साड़ी पहनकर बदल जाते हैं?

इन सभी बातों से परे एक आसान-सी बात सोचिए, आप ऑफिस शर्ट पहनकर जाते हैं और घर पर टी-शर्ट पहनते हैं, तो क्या आपकी सोच कपड़ों के बदलने से बदल जाती है? या फिर आप- आप नहीं रहते.

बेशक कपड़ों के अपने ही मायने हैं लेकिन हम अपनी मर्जी किसी पर थोप नहीं सकते. चाहें हम किसी को जर्बदस्ती बुर्का पहनाने की कोशिश करें या दबाव डालकर बुर्का उतारने की कोशिश करें. दोनों ही सूरतों में ये गलत है क्योंकि लोकतंत्र किसी एक का नहीं है. …Next



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
August 31, 2017

कोई बतलाये मुझे की ऐसे ड्रेसों को पहनने का उद्देश्य क्या होता है / पहनावा भी संस्कृति का एक अंग है और जब पहनावे का उद्देश्य अपने शरीर को खासकर कुछ विषेस अंगों की नुमाइस हो तो क्या इससे संस्कृति खतरे में नहीं पड़ेगी / अपने को आधुनिक बनाने के चक्क्र में महिलाये खुद को कामुक बनाने में लगी है और इस कामुकता का शिकार बच्चियों और बुर्के में ढकी महिला भी हो रही है /


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