blogid : 316 postid : 1324703

मर्दो की ‘परफेक्ट फिगर वाली लड़की’ होती है ऐसी, विज्ञापन के बाद 12वीं की ये किताब भी बता रही है

Posted On: 13 Apr, 2017 Social Issues में

Pratima Jaiswal

  • SocialTwist Tell-a-Friend

गोरा रंग, लंबाई 5 फीट 7 इंच, पतली कमर, बड़ी-बड़ी काली आंखें, लंबे घने बाल. एक लड़की की शारीरिक विशेषताएं ये है. ये बातें पढ़कर बेशक आपने दिमाग में भी ऐसी लड़की की छवि बनेगी, जो बहुत ‘खूबसूरत’ होगी.


perfect

अब इन विशेषताओं की उल्टी कल्पना कीजिए, जिसमें लड़की मोटी-नाटी या सांवली-काली हो, अब आप सुंदरता या खूबसूरत लड़की की छवि से दूर जा रहे होंगे. हमारे दिमाग में बचपन से ‘खूबसूरत’ या ‘सुंदरता’ की जो परिभाषा भरी जाती है या हम बड़े होने पर जिसे अपने आसपास देखते हैं हमारे लिए वहीं सुंदरता से जुड़ा सच हो जाता है. जबकि सच तो ये है कि सुंदरता की कोई परिभाषा बनी ही नहीं है.


fairness-creams-250x250


बात करें, समाज की बनाई हुई परिभाषा की, तो गोरा रंग आज उतना ही जरूरी समझा जाता है जितनी की अंग्रेजी. बल्कि गोरा बनाने वाली क्रीम के विज्ञापनों में आपको गोरा बनते ही अच्छी जॉब, अपना घर और एक अमीर लड़का खुद प्रपोज करने आ जाएगा. वो भी बस, क्रीम लगाते ही. आगे पढ़ने से पहले जान लीजिए, फिर से कैसे गरमाया ये बरसों पुराना मुद्दा? क्या था मामला?


अभय देओल ने ऐसे ली खबर

दुनिया की ‘खूबसूरती’ की इसी मानसिकता का फायदा उठाकर बाजारवाद फल-फूल रहा है. हाल ही में अभिनेता अभय देओल ने गोरा बनाने वाली क्रीम का विज्ञापन कर रहे फिल्मी सितारों की जमकर खबर ली. उन्होंने क्रीम का विज्ञापन कर रहे सितारों की फोटो और उनके प्रोडक्ट को ट्वीट करके रंगभेदी मानसिकता की आलोचना की.


abhay


ऐसे तो बच्चा भी नहीं करता, जो सोनम ने कर दिया

जवाब में हाल ही में नेशनल अवार्ड विजेता सोनम कपूर ने वो कर दिखाया, जो आजकल के स्कूल के बच्चे भी नहीं करते. उन्होंने अभय देओल की बहन ईशा देओल का करीब 10 साल पुराना गॉनियर क्रीम का विज्ञापन इंटरनेट से खंगालकर ट्वीट करते हुए लिखा ‘मैं आपके विचारों का सम्मान करती हूं लेकिन इस बारे में आपका क्या कहना है?


सोनम के ट्वीट का जवाब देते हुए अभय ने कहा ‘बेशक ये भी गलत है, आप मेरे विचारों को समझने के लिए फिर से मेरा पोस्ट पढ़ें. एक नेशनल अवार्ड विजेता अभिनेत्री के इस बचपने भरे रवैए की सोशल मीडिया पर खूब आलोचना हुई. जिसके बाद सोनम ने ट्वीट डिलीट करके सुबूत मिटाने जैसी कोशिश की.


sonam

‘आप जो हैं उसे क्यों नहीं स्वीकारते’ वाली बकवास

जी हां, अब तो ये सच महज एक बकवास बनकर ही रह गया है. बचपन से हमें सिखाया जाता है कि आप काले, गोरे, लंबे, छोटे, पतले, मोटे कुछ भी हो, जैसे हैं खुद को स्वीकार कर इन बातों से ऊपर उठें. जबकि दूसरी तरफ हमारी शिक्षा व्यवस्था कुछ और ही सीखा रही है. ये हम खुद नहीं कह रहे बल्कि सीबीएसई 12वीं की फिजिकल एजुकेशन की किताब कह रही है. इसमें महिलाओं के ‘बेस्ट’ फिगर के बारे में जानकारी दी गई है कि 36-24-36 को बेस्ट फिगर माना गया है. किताब का कहना है मिस वर्ल्ड और मिस यूनिवर्स की प्रतियोगिताओं में भी यही फिगर ध्यान में रखा जाता है. अब आप ही बताएं ये पढ़कर बच्चे क्या सीखेंगे और क्या सिखाएंगे? इस मानसिकता का फायदा उठाकर अगर कल बाजार में कोई बेस्ट फिगर बनाने वाली क्रीम या गोली आ जाए, तो किसी के लिए हैरानी की बात नहीं होगी.


book

‘मानसिकता’ पर हावी होता ‘बाजारवाद’

जैसे हम सब में स्वीकारने का भाव कम होकर ‘परफेक्ट’ बनने की इच्छा प्रबल हो रही है, वैसे-वैसे बाजारवाद हम पर हावी होता जा रहा है. जिसका फायदा सिर्फ गोरा बनाने वाली क्रीम ही नहीं बल्कि लंबाई बढ़ाने की गोली, बाल काले करने का तेल, पाउडर, बढ़ती उम्र को रोकने के लिए क्रीम, गोली, होठों को गुलाबी रखने के लिए बाम, पतला-मोटा बनाने के लिए डाइट पाउडर वगैरह…वगैरह बड़ी आसानी से उठा रहे हैं.


tani3


ये विज्ञापन भी नहीं पीछे

हाल ही में तनिष्क का एक विज्ञापन आया था, जिसमें ऐसे आर्दश पिताओं को दिखाया गया था, जो अपने बेटियों को गहनों से लादकर विदा करते हैं. भावनाओं और मानसिकता के घालमेल से बना ये विज्ञापन काफी लोगों की आंखों में खटक गया था. इस विज्ञापन में हर शादी बड़े घराने की हैं, जहां पर गहनों से लदी हुई दुल्हनें हैं. वहीं दूसरी ओर बाजार में ऐसे कई उत्पाद  भी आ गए हैं, जिसमें शरीर के निजी भागों को गोरा करने का दावा किया गया है.


advt 3


आपके सितारे क्रीम से नहीं सर्जरी से गोरे बने हैं

सच तो ये है कि दुनिया में कोई ऐसी क्रीम बनी ही नहीं, जो काले को दूध-सा गोरा बना सके. जिन सितारों को हम ऐसी क्रीम बेचते हुए देखते हैं. उनमें से ना जाने कितनों ने विदेशों से कितनी ही सर्जरी करवाई हैं.


baby

सुंदरता, खूबसूरती की परिभाषा ये नहीं है, जो विज्ञापनों में दिखती है

वैसे तो सुंदरता की कोई परिभाषा नहीं है. सुंदरता वही बने रहने में हैं, जैसे आप असल में हैं. जिस दिन आप खूबसूरती, सुंदरता के इन ‘स्टीरियोटाइप’ से ऊपर उठ जाएंगे. उस दिन आप बाजारवाद के इस मकड़जाल से निकलकर खूबसूरत इंसान बन जाएंगे. वो भी असल खूबसूरत…Next



Read More :

इनकी मौत पर नहीं था कोई रोने वाला,पैसे देकर बुलाई जाती थी रुदाली

नींद के सौदागर करते हैं 30 रुपए और एक कम्बल में इनकी एक रात का सौदा

एक वेश्या की वजह से स्वामी विवेकानंद को मिली नई दिशा



Tags:                   

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran