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भारत की इन जगहों पर परिवारवाले ही लड़कियों को वेश्यावृत्ति के दलदल में ढकेलते हैं

Posted On: 23 Jan, 2016 social issues में

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भारत की ये कुछ ऐसी जगहे हैं जहां वेश्यावृत्ति सामाजिक प्रथा बन चुकी है. हम ये तो नहीं कहते कि यहां वेश्यवृत्ति में जो औरते उतरती हैं उनके सामने किसी प्रकार की मजबूरी नहीं होती पर इतना जरूर है कि उनके वेश्यावृत्ति में जाने से उनके परिवार वाले बिल्कुल भी शर्मिंदा नहीं होते. सच्चाई तो ये है कि यहां लड़कियों को खुद उनके परिवारवाले ही वेश्यावृत्ति के दलदल में ढकेलने को आतुर रहते हैं. अगर यहां सिक्के का दूसरा पहलू देखें तो यहां की लड़कियां किसी अन्य जगह के मुकाबले वेश्यावृत्ति में उतरने के लिए ज्यादा मजबूर हैं.


Prostitute


1. मध्यप्रदेश की बंचरा जनजाति
इस जनजाति में घर को चलाने की जिम्मेदारी घर की सबसे बड़ी बेटी पर होती है. इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए घर की बेटियां कोई नौकरी या व्यवसाय नहीं करती बल्कि जिस्मफरोशी करने के लिए मजबूर रहती हैं. इस जनजाति की बेटियां यह धंधा न भी करना चाहें तो भी पिता और भाई मिलकर बड़ी बेटी को इस काम में उतार देते हैं. चाहकर भी यहां लड़कियां वेश्यावृत्ति के लिए मना नहीं कर सकती.


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2. नटपुरवाः उत्तरप्रदेश

इस गांव के किसी भी बच्चे को अपने बाप का नाम नहीं पता. पिछले 400 सालों से नट जाति के इस गांव में जिस्मफरोशी एक परंपरा की तरह चली आ रही है. समय के साथ इस गांव में भी शिक्षा का स्तर सुधरा है, पर वेश्यावृत्ति की परंपरा यहां इतनी जड़े जमा चुकी है कि टूटने का नाम नहीं लेती.


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3. वाडिया, गुजरात

सदियों से गुजरात की छवि एक ऐसे राज्य की रही है जो व्यापार में अव्वल रहा है, पर गुजरात के इस गांव में जो व्यापार होता है उस पर यह राज्य तनिक भी गर्व नहीं कर सकता. क्योंकि गुजरात के वाडिया में देह का व्यापार होता है.  देह व्यापार का यह धंधा यहां सदियों से होता आया है. पुरूष यहां पर दलालों का काम करते हैं और लड़कियों को इस काम के लिए प्रोत्साहित करते हैं. समस्या यह है कि शिक्षा बढ़ने और समय बीतने के बाद भी यहां कोई बदलाव नहीं आ पाया.



BANGLADESH-PROSTITUTION/


4. देवदासीः कर्नाटक

इस परंपरा की शुरुआत धार्मिक परंपरा के तौर पर हुई थी. कर्नाटक में देवदासी प्रथा के तहत लड़कियों को देवी बनाकर मंदिर को सुपुर्द कर दिया जाता है बाद में उन्हें वेश्या बना दिया जाता है जो मर्दों की सेवा करती हैं. इनके बदले में लड़की के घर वालों को पैसा दिया जाता है. गौरतलब है कि प्रचीन समय में देवदासियां मंदिरों में सिर्फ नर्तकी का काम किया करती थीं. लेकिन समय के साथ इस प्रथा का रूप बदल गया और यह प्रथा वेश्यवृत्ति का प्रयाय बन गई. Next…


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