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400 कुत्तों को रोजाना 8 हजार की लागत से खाना खिलाते हैं ये 60 साल के दंपत्ति

Posted On: 24 Dec, 2015 social issues में

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‘महलों में रहने वाले लोगों का किस्सा क्या, मसला तो उनका है आवारा गलियां ही जिनका घर बन चुकी हैं.’ जी हां, शहर की आधुनिकता का एक पहलू ये भी है कि यहां एक तबका ऐसा भी है जो सड़कों और गलियों में रहता है. आपके मन में भी इन लोगों को कभी न कभी देखकर कई सवाल आए होंगे. लेकिन फिर आप को लगा होगा कि इसमें आप क्या कर सकते हैं. ऐसे में सड़कों और गलियों में एक वर्ग ऐसा भी है जिनके घूमने को आप सामान्य-सी बात समझ सकते हैं. वो है ‘कुत्ते’. बेशक सड़कों पर घूमने वाले कुत्तों को देखकर अधिकतर लोग यहीं सोचेगें कि यहां इंसानों के रहने के लिए जगह नहीं है ऐसे में गली के आवारा कुत्तों के घर में रहने की बात कहां तक जायज है. लेकिन जरा एक बार और सोचिए सड़कों पर रहने वाले इन लोगों और कुत्तों में एक समानता है और वो है ‘भूख’.


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ऐसे में अगर कोई आपसे कहे कि रोजाना कुत्तों को रोटी खिलाने की आदत डालने से आप कुछ भला काज कर सकते हैं. तो आप शायद ही किसी एक कुत्ते को रोजाना रोटी खिलाने की आदत को निभा पाएं. इसका सीधा-सा कारण ये है कि आधुनिक जीवनशैली में अपने लिए ही समय निकालना मुश्किल हो गया है ऐसे में इन कुत्तों की भूख की किसे पड़ी है. लेकिन दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दुनिया की सोच से परे काम करना पंसद करते हैं.

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करीब 60 साल की उम्र के पड़ाव में कदम रख चुके दासगुप्ता दंपति ने सड़क पर भूखे घूमते आवारा कुत्तों को खाना खिलाने का बीड़ा उठाया है. आपको जानकर हैरानी होगी कि सुलक्ष्मी दासगुप्ता और पिनाकी दासगुप्ता रोजाना अपने खर्च से करीब 500 गली में घूमने वाले कुत्तों को खाना खिलाते हैं. इसमें करीब रोजाना आठ हजार रुपए का खर्चा आता है. कमाल की बात ये है कि ये खाना बचा हुआ या बासी नहीं बल्कि ताजा और खास इनके लिए बनाया जाता है.

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चिकन, दूध, चावल, मटन आदि का इस्तेमाल करके बनाए गए इस खाने को बांटने के लिए सैलेरी पर सात कर्मचारी रखे गए हैं. जिनमें वैन के ड्राइवर रमेश, सुनिता और अनिल नाम के कर्मचारी प्रमुख रूप से जुड़े हुए हैं. अपने इस खास मकसद के बारे में बताते हुए पिनाकी दासगुप्ता कहते हैं कि ‘मेरा मानना है कि दुनिया में जितने हक इंसान को मिले हुए हैं उतने ही हक जानवरों को भी मिले हुए हैं. अगर मुझे भविष्य में आर्थिक मदद मिले तो मैं रोजाना 500 नहीं बल्कि पूरी दिल्ली के कुत्तों को खाना खिलाऊंगा.’


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इस काज के लिए दोनों दंपति दिन के 18 घंटे देते हैं जिसमें खाना बनाने की प्रक्रिया से लेकर ग्रेटर कैलाश, भैरों मंदिर, ओखला और चितरंजन पार्क के आसपास की जगहों पर जाकर कुत्तों को खाना खिलाना शामिल है. कुत्तों को खाना खिलाने के अलावा दुर्घटना में घायल और अन्य छोटी-मोटी बीमारियों से ग्रस्त हुए कुत्तों को दवा देने के साथ वैक्सीनेशन भी दिया जाता है. वाकई उम्र के इस पड़ाव में संसारिक बातों से परे इस अनोखी मिसाल को देखकर आप भी कम से कम एक बार तो कुछ सोचने को मजबूर हो जाएंगे.

इसके अलावा हम में से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो मानवता के लिए ऐसे ही किसी भले काज का हिस्सा बनना चाहते हैं लेकिन उन्हें किसी साथ की जरूरत होती है. अगर आप भी इस प्रेरणास्त्रोत दंपत्ति के इस भले काज में सहयोग देना चाहते हैं तो 9910576883 न. पर सम्पर्क  कर सकते हैं. साथ ही swargasaathi@gmail.com  ई-मेल  पर भी सम्पर्क किया जा सकता है  Next


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