blogid : 316 postid : 1125177

इन्होंने नौकरी छोड़ी, कार बेच दी, लोन लिया सिर्फ इसलिए ताकि भारत स्वच्छ बन सके

Posted On: 23 Dec, 2015 social issues में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अभिषेक महरवा ने कुछ भी ऐसा नहीं किया जिसे कोई दूसरा नहीं कर सकता था. अंतर बस इतना है कि अभिषेक ने पहल की. सड़क पर दौड़ती गाड़ियों से कूड़ा बाहर फेंकने का नजारा भारत में दुर्लभ नहीं. जब कभी हम किसी को ऐसा करते देखते हैं तो बुरा लगता है लेकिन कई बार जाने अंजाने में हम खुद ऐसी हरकत करते हैं. अभिषेक महरवा भी पहले अपनी कार से कचड़ा बाहर फेंकने से पहले सोचते नहीं थे लेकिन जब उन्होंने यह वाक्य पढ़ा तो उनकी पूरी जिंदगी ही बदल गई. यह वाक्य था “जो कचड़ा बाहर फेंकता है दरअसल वह अपनी इंसानियत भी फेंक देता है.”


abhishek-marwaha1


अभिषेक सोचने लगे की कैसे हम लोगों की इस आदत को सुधार सकते हैं. एक दिन खाना खाते हुए उन्होंने देखा की उनका लंचबॉक्स पुराना हो चुका है और इसे कार में कूड़ेदान के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे पहले अगर यात्रा करते समय कूड़ा-करकट को अभिषेक अपने कार के पीछे या जेब में जमा करते रहते थे जिसे वे यात्रा समाप्त होने पर किसी कूड़ेदान में डाल दिया करते. अभिषेक की यह आदत उनके दोस्तों में मजाक की वजह भी बनती लेकिन वे अपने स्वचछता अभियान को लेकर दृढ़संकल्प थे. लंचबॉक्स को कार के लिए कूड़ेदान बनाने के अपने इस आईडिया को वे अगले मुकाम पर ले गए.


Read: ऐसा क्या हुनर है उसमें जो भटकती आत्माओं को उसके ठिकाने से होकर गुजरना ही पड़ता है


वे कार के लिए ऐसे कूड़ेदान का डिजाइन सोचने लगे जो न सिर्फ देखने में अच्छा लगे बल्कि सस्ता भी हो. कई कोशिशों के बाद अभिषेक ने आखिरकार कार के लिए पोर्टेबल ट्रेशबिन के एक डिजाइन को आखिरी रूप दिया और इसे बेचने के लिए एक ऑनलाईन स्टोर खोला जिसका नाम है यूजोशोडॉटकॉम (ujosho.com). अभिषेक बताते हैं कि जोशो एक जापानी शब्द है जिसका मतलब होता है जीत और इसके आगे ‘यू’ यह संकेत देने के लिए जोड़ा गया है कि इस ट्रैशबिन के इस्तेमाल से आप गंदगी को हमेशा हराएंगे.


swach-bin


अभिषेक अपने इस उत्पाद को सड़क पर भीख मांगने वाले बच्चों को बेचने के लिए मुफ्त में भी बंटवा देते हैं. उन्होंने अपने इस प्रोडक्ट को पेटेंट नहीं करवाया है क्योंकि उनका मानना है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस तरह के आईडिया के साथ सामने आएं ताकि इस तरह के उत्पाद को और भी सस्ते दाम में उपलब्ध करवाया जा सके. यहां तक पहुंचने के लिए अभिषेक को कई कुर्बानियां देनी पड़ी अपने मकसद को अंजाम तक पहुंचाने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी, अपनी कार बेच दी और लोन भी लिया. अभिषेक का कहना है कि उनका एकमात्र मकसद यह है कि भारत स्वच्छ बने और इस तरह के उत्पाद लोगों की आदतों को सुधारने में मदद कर सकते हैं. Next…


Read more:

गजब! अपने हुनर से इस लड़के ने बना दी जेसीबी मशीन

इस व्यक्ति में है गजब का हुनर, दुकान पर आने वाले लोग रह जाते हैं हक्के-बक्के

अनोखा आविष्कार: अब इसके बिना आपकी बाइक नहीं होगी चालू



Tags:             

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran