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मात्र 600 रुपए के फायदे के लिए 3 दिन साइकिल खींचते हैं ये कोयलावाले

Posted On: 10 Sep, 2015 social issues में

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हजारीबाग को जाती राष्ट्रीय राजमार्ग चार पर यह नजारा दुर्लभ नहीं है. किसी जर्जर साइकिल पर दो-ढ़ाई सौ किलो कोयला लादे कोई दुबला-पतला व्यक्ति सैकड़ों किमी लंबी सड़क पर खींचे ले जा रहा है. अमूमन इनकी साइकिल पर लदे कोयले का वजन इनके अपने वजन से 5 गुना अधिक होता है. इन्हें झारखंड में कोयलावालों के नाम से जाना जाता है. चींटियों के समान ही ये कोयलावाले अपने वजन से कई गुना अधिक कोयला साइकिल पर खींचते हैं. बस इसलिए ताकि इन भूमिहीन मजदूरों के घर के चूल्हों में आग जल सके.



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1971 में केंद्र सरकार द्वारा कोयले का राष्ट्रीयकरण कर दिए जाने के बाद घर में प्रयोग करने या छोटी मात्रा में बाजार में बेचने के लिए कुल्हाड़ी या हाथ से कोयला खोदना गैरकानूनी हो गया. लेकिन झारखंड के उन क्षेत्रों में जहां जमीन के नीचे काला सोना दबा हुआ है, ऐसे कई परिवार हैं जिनकी अपनी कोई जमीन नहीं है. इन परिवार के सदस्य लंबी-लंबी यात्राएं करते हैं और खाली या विवादित कोयला खदानों से काला पत्थर खोंदकर आसपास के शहरों के घर, ढ़ाबा और ईंट भट्टियों में इन्हें पहुंचाने का काम करते हैं.


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मुकेश गुप्ता भी यही काम करते हैं. वे हर सुबह तकरीबन ढाई सौ किलो कोयला से भरे 8 बोरो को अपनी साइकिल के दोनों तरफ लटका कर हजारीबाग बेचने ले जाते हैं. सुबह 9 बजे ही पसीने से तर-बतर हुए मुकेश बताते हैं कि यह काम हड्डियां चटका देने वाला है. वे कोयले से भरे इन बोरों को अपनी जर्जर साइकिल पर 30-60 किमी तक खींचते हैं.



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झारखंड के टूटी-फूटी सड़कों पर ये कोयलावाले अक्सर समूह में चलते हैं. हर साल लगभग 20 लाख टन कोयला, राज्य की कोयला खदानों से चोरी हो जाता है. इसमें इन गरीब कोयलावालों का हिस्सा बहुत छोटा होता है. लेकिन ये हर समय पुलिस द्वारा पकड़े जाने और अपनी रोजी-रोटी के छिन जाने के भय में जीते हैं.


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तिलेश्वर महतो बताते हैं कि उन्होंने 400 रुपए में 20 बोरा कोयला खरीदा है जिसे वे बेचने के लिए रांची ले जाएंगे. “अगर मैं यह सारा कोयला बेचने में सफल रहता हूं तो मुझे 600 रुपए का फायदा होगा.” इस पूरे कोयले को रांची पहुंचाने में महतो को 3 दिन लगेंगे. कुछ दूर तक उनकी पत्नी उनके साथ आती हैं जो उन्हें साइकिल खींचने में मदद करती हैं फिर वापस घर लौट जाती हैं. बाकि का रास्ता महतो को अकेले तय करना रहता है.


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महतो बताते हैं कि अब कोयले का दाम काफी गिर गया है और इसकी वजह सस्ती गैस की उपलब्धता है. “मैने सुना है कि अब सबको मोदी के कारण सस्ती गैस मिल जा रही है.” Next…


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