blogid : 316 postid : 1075353

इनके प्रयासों से बढ़ रही है इस गांव में रईसों की संख्या

Posted On: 31 Aug, 2015 social issues में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

शायद आपने हिवरे बाजार गांव का नाम सुना होगा. ऐसा माना जाता है कि यह भारत का सबसे अमीर गांव है जहां तकरीबन 60 करोड़पति हैं. आज अत्यधिक साफ सड़कें, खूबसूरत घर और ढेरों पुरस्कार इस गांव की पहचान है लेकिन इस गांव में हमेशा सबकुछ ऐसा ही नहीं था. कुछ  दशक पहले यह गांव सूखे और गरीबी का दंश झेल रहा था लेकिन एक अकेले आदमी ने इस गांव की सूरत बदल डाली. इस आदमी का नाम है पोपटराव पवार. 52 साल के पोपटराव वह व्यक्ति है जिन्होंने अकेले ही महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में पड़ने वाला हिवरे बाजार गांव की काया पलट दी.


Popatrao


यह गांव स्वशासन और आत्मनिर्भरता के उसूलों का पालन करता है. इस गांव के कायापलट का किस्सा सन 1972  से शुरू हुई जब पोपटराव शहर से स्नातक की डिग्री लेकर गांव लौटे. क्योंकि उस समय वे गांव के सबसे पढ़े-लिखे आदमी थे इसलिए गांव वालों ने उनसे पंचायत का चुनाव लड़ने का आग्रह किया. पोपटराव पंचायती चुनाव में उतरे और विजयी रहे. और फिर सूखे की मार झेल रहे इस गांव में अनगिनत सुधारों का कभी न रुकने वाला सिलसिला शुरू हुआ.


Read: अनोखा संबंध: इस गांव में पेड़ बेटियों और बेटियां पेड़ों को बचाती हैं


सबसे पहले गांव के चौथी कक्षा तक के प्राथमिक विद्यालय को दसवीं तक किया गया. अब गांव में बच्चों को आसानी से स्कूली शिक्षा मिलने लगी थी. इसके बाद पोपटराव ने जल संरक्षण का कार्य शुरू किया. उन्होंने गांव में ट्यूबवेल प्रतिबंधित करा दिया और गांंव वालों से केवल खुले कुंए के पानी पर निर्भर रहने के लिए कहा. इस तरह भूजल के अत्यधिक उपभोग पर लगाम लग सकी. उन्होंने लगभग 40000 गड्ढे खुदवाए जिनमें भूजल संरक्षित किया जाने लगा. गांव मे वैसी फसल लगाई जाने लगी जिसमें पानी की कम खपत हो और बाजार में वह अच्छे दामों पर बिके.  वनों की कटाई को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया और एक दशक के अंदर गांव में 10 लाख से अधिक पेड़ लगाए गए.


GramSansad1


1995 में आदर्श गांव योजना का आगाज किया गया और इस गांव को आदर्श गांव के रूप में विकसित करने के लिए चुन लिया गया. गांव के विकास संबंधी सभी निर्णय ग्राम सभा करती है जिसे यहां ग्राम संसद कहा जाता है. इन सभी सकारात्मक बदलावोंं के कारण यह गांव धीरे-धीरे संपन्न होता गया और आदर्श गांव के रूप में विकसित होता गया. इस गांव में परिवार नियोजन और एचआईवी के रोकधाम पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है. यह गांव देश के उन चुनिंदा गांवों की सूची में शामिल है जहां लिंग अनुपात महिलाओं के पक्ष में है.


House


इस गांव की तरक्की की कहानी इस तुलना से साफ समझ में आ जाती है. जहां प्रति व्यक्ति आय 1995 में  830 रुपया था वहीं  2012  में यह 30,000 रुपया हो गया. 1995 कूओं की संख्या 90 थी जो 2012  में बढ़कर 294 हो गई. यही नहीं, 1995 में इस गाव के 168 परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे थे जो 2012 में घटकर मात्र  3 रह गई. वहीं दूध के उत्पादन की बात करें तो 1995 में यह 150 लीटर था जो 2012 में बढ़कर  4,000 लीटर हो गया.


Read: एक ऐसा गांव जहां हर आदमी कमाता है 80 लाख रुपए


कभी इस गांव से लोग अन्य जगह पलायन किया करते थे लेकिन अब पलायन की दिशा बदल गई है. लोग अब वापस इस गांव की तरफ लौट रहे हैं और गांव की तरक्की में हिस्सा बन रहे हैं साथ ही यहां हुई तरक्की का लाभ भी उठा रहे हैं. कहना गलत न होगा कि यह सब कुछ पोपटराव पवार के दूरदृष्टि के कारण ही संभव हो पाया है. Next…


Read more:

हनुमानजी की इस गलती की सजा आजतक भुगत रही हैं इस गांव की महिलाएं

भूत-प्रेत की वहज से छोड़ा गया था यह गांव, अब पर्यटकों के लिए बना पसंदीदा जगह

सिकंदर के सैनिकों का वंशज है यह गांव, नहीं चलता यहां भारतीय कानून!



Tags:                   

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 1.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nollie के द्वारा
October 17, 2016

Your answer lifts the ineneligltce of the debate.


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran