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पेंशन के पैसों से सड़कों के 1,125 गड्ढे भर चुका है यह रेलवे कर्मचारी

Posted On: 4 Jun, 2015 Others,social issues में

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पुरानी कहावत है, कि ठोकर लगने पर रास्ते में पड़े पत्थर को कोसने से अच्छा है उस पत्थर को हटा दो. लेकिन कम ही ऐसे लोग होते हैं जो इस कहावत को असल जिंदगी में आजमाते हैं. ऐसे ही कम लोगों में से एक हैं हैदराबाद में रहने वाले रेलवे के रिटायर हो चुके कर्मचारी गंगाधर तिलक. ये बात अलग है कि गंगाघर रास्ते में पढ़े पत्थर नहीं हटाते बल्कि गड्ढे भरने का काम करते हैं. अपनी पेंशन का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने अकेले ही अबतक शहर के 1,125 गड्ढे भर दिया है. एक छोटी सी घटना से शुरू हुआ उनका यह काम आज उनके लिए एक मिशन बन गया है.


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गंगाधर बताते हैं कि उनके इस मिशन की शुरुआत तब हुई जब कार चलाते हुए उनके कार का पहिया सड़क के एक गड्ढे में पड़ गया जिससे गंदा कीचड़ उछलकर पास खेल रहे बच्चों के कपड़ों को गंदा कर गया. इस घटना से गंगाधर काफी शर्मिंदा हुए और उसी समय उन्होंने 5000 रुपए खर्च कर खुद ही उस गड्ढे को भरा. इस घटना के बाद गंगाधर ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. सड़कों के गड्ढे भरना उनकी जिंदगी का मकसद बन गया.


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पिछले ढाई सालों से वह अपने पैसों से सड़कों के गड्ढे भर रहे हैं. अब कई आम नागरिक और प्रोफेशनल गंगाधर के इस मकसद में श्रमदान देकर उनका हौसला बढ़ा रहे हैं. अब ग्रेटर हैदराबाद म्यूनिसिपल कॉपरेशन उन्हें गड्ढे भरने की सामग्री मुहैया कराकर उनके मकसद में सहयोग दे रही है.



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गंगाधर के अनुसार लोगों की जिंदगी को खतरे में डालने वाले इन गड्ढों को भरने के प्रति वे और गंभीर तब हो गए जब उन्होंने देखा की गड्ढे में पहिया चले जाने से एक बाइक सवार का हाथ टूट गया और एक ऑटो बस से टकरा गई. इस घटना में ऑटो चालक के साथ बस में बैठे लोगों को भी चोटें आईं.



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गंगाधर हर सुबह अपनी कार में बैठकर लंबी ड्राइव पर जाते हैं यह पता लगाने की शहर की सड़कों पर कहीं कोई गड्ढा तो नहीं है. रोज वे 500 रुपए का ईधन कार में फूंकते हैं. उनके कार में जूट के 8-10 बोरे पड़े रहते हैं जिसमें सड़कों के गड्ढे भरने की सामग्री भरी रहती है.



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जाहिर है कि उनकी पत्नी को उनका यह मकसद पसंद नहीं आया होगा. उन्होंने अमेरिका से अपने बेटे रवि को बुलाया ताकि वे अपने पिता को यह काम बंद करने के लिए समझाए. लेकिन जब रवि ने अपने पिता का काम देखा तो वे इसके महत्व को समझ गए और उनके इस काम में मदद करने लगे. रवि अपने पिता के इस मकसद के लिए न सिर्फ पैसे भेजते हैं बल्कि उन्होंने एक मोबाइल एप भी तैयार कराया जिसके जरिए लोग सड़क के गड्ढों के बारे में जानकारी उनके पिता को दे सकें. Next…


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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Meeta के द्वारा
June 10, 2015

very nyc work sir…ure an inspiration ….truly living life to the fullest

शेखर के द्वारा
June 5, 2015

टिलक जी को काम को सलाम. कृपया उनका संपर्क नंबर मिल सकता है,  

peerbab के द्वारा
June 5, 2015

sar aap bhot acha kam krhy h best of luck

SHABBIR AHMED के द्वारा
June 4, 2015

अच्छा काम कर रहे है. इन्शानियत की यही निसानी होती है .


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