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पति ने गोली मारी 6 पुलिसवालों ने रक्त दान कर बचायी जान

Posted On: 21 Apr, 2015 social issues में

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बैशाख का यह तीसरा सप्ताह यादगार हो सकता है. यादगार इसलिये नहीं कि भारतीयों ने कुछ हासिल कर लिया है बल्कि इसलिये क्योंकि इस सप्ताह के शुरूआत में ही पाठकों का सामना तीन चौंकाने वाली ख़बरों से हुआ. ये तीनों ख़बरे हत्या, आत्महत्या और मौत से जुड़ी है. इन ख़बरों में अत्यंत अहम है कि पीड़ित महिला ही है. तीनों मामलों में महिलाओं की उम्र 20 से 40 वर्ष के बीच है.


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मामला एक समलैंगिक स्वभाव के लड़के से प्यार और शादी का-

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में चिकित्सा के पेशे से जुड़ी युवती प्रिया वेदी ने उसी संस्थान में चिकित्सक लड़के के साथ परिवार की सहमति से शादी रचायी. शादी के कुछ ही दिनों बाद उसे अपने पति के समलैंगिक होने का आभास हुआ. यह रहस्योद्घाटन उसके लिये किसी सदमे से कम नहीं थी. तमाम विकल्प खुले होने के बावजूद चिकित्सक पत्नी ने उसके साथ रहने की ठानी. लेकिन उन दोनों के बीच के झगड़े बढ़ते गये जिसके कारण महिला चिकित्सक को आत्महत्या करनी पड़ी.


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पति ने गोली मारी पुलिसवालों ने लहू दान कर जान बचायी

यह मामला दिल्ली के दक्षिण-पूर्वी इलाके के सनलाइट कॉलोनी पुलिस स्टेशन का है. आश्रम के हरि नगर इलाके में मुम्बई में काम करने वाली महिला मॉडल नेहा को उसके आरोपित पति ने गोली मार दी. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के ट्रॉमा केंद्र में बीते रविवार को दूसरी बार उसकी सर्जरी की गयी. उसका जीवन दाँव पर था और उसके पिता के लिये यह शहर अंजान था. पिता ने अपनी परेशानी पूछताछ के लिये आये थानेदार ओ पी लेखवाल को बतायी. अगले दिन लेखवाल अपने सहयोगी कर्मचारियों ललित, विपिन सांगवान, गोपाल, विनोद, रणबीर को साथ लेकर 21 वर्षीया मॉडल की जान बचाने के लिये जरूरी रक्त के दान के लिये पहुँच गये. वहाँ चिकित्सकों ने जरूरत पड़ने पर और रक्त लेने की बात कहकर उनमें से केवल चार लोगों का ही रक्त लिया. अब उस मॉडल की स्थिति ख़तरे से बाहर है.


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समाज सेविका ने पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली

एक चुलबुली लड़की शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाने की कोशिशें कर रही थी. पठन-पाठन के तौर-तरीक़ों को आसान और सुलभ बनाने का यत्न करते-करते एक दिन अंशु सचदेवा ने फ़रीदाबाद के अपने ही घर में पंखे को अपनी मौत का सहारा बना लिया. भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता का पाठ्यक्रम पूरा कर वह समाज के लिये कुछ नया करना चाहती थी. ख़बरों के अनुसार अपने सहपाठी, प्रेमी और भावी मंगेतर से आपसी रिश्ते संबंधी अनबन के कारण उसने यह कदम उठाया.


आत्महत्या या हत्या कोई विकल्प नहीं है. क्यों कोई इंसान इतना विवश हो जाता है कि वह अपनी बातों को किसी के सामने खुल कर कह नहीं सकता? क्या समाज इतना विभाजित है? क्या दोस्ती भी महज एक ढ़ोंग बन कर रह गयी है? ये सारे सवाल अनुत्तरित है जिनके गर्भ में जाने के सिवाय इंसानों के पास सम्भवत: कोई विकल्प नहीं है!Next….


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