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बीजेपी सांसद पूनम बेन की मौजूदगी में तीस सेकेंड में तीन करोड़ लुटाने वालों का ये है सच

Posted On: 20 Apr, 2015 social issues में

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‘गुजरात के वेरावल में भागवत कथा के आयोजन पर नोटों की बारिश हुई. इस कार्यक्रम में सांसद पूनम बेन की मौजूदगी में करीब 3 करोड़ रूपये लुटाये गये.’ ये पंक्तियाँ बीते दिनों मीडिया के तीनों रूपों अख़बारों, टेलीविज़न और ऑनलाइन पर पढ़ी और देखी-सुनी गयी. दस, पचास, सौ, पाँच सौ, हजार के नोटों की जब गिनती हुई तो आँकड़ा तीन करोड़ तक पहुँच गया. हालांकि यह मुद्दा सासंद पूनम बेन पर जाकर टिक गयी और भारतीय समाज एक बार फिर अपनी गली-मोहल्लों की करतूतों को छुपाने में कामयाब हो गया.


bjp MP


जिस देश में किसानों को फसल नष्ट हो जाने पर एक रूपये तक के मुआवज़े दिये जा रहे हैं उस देश में भागवत कथा के आयोजन में गायकों पर लुटाये गये तीन करोड़ रूपयों से भारतीय समाज की स्थिति का आकलन किया जा सकता है. यह वर्तमान भारतीय समाज का सच्चा चरित्र है. भारत देश में तथाकथित धार्मिक कहे जाने वाले आयोजनों में जो होता है उनसे हम मुँह फेर सकते हैं, उसे अनदेखा कर सकते हैं, लेकिन उससे इंकार बिल्कुल नहीं.


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पाठक जानते हैं कि उनके गली-मोहल्लों में किसी पर्व-विशेष को सामूहिक रूप से मनाने के लिये तरह-तरह के यत्न किये जाते हैं. लेकिन इन यत्नों से आस्था अब गायब होती जा रही है. शराब, नोट, सिक्कों, डीजे ने अब आस्था को दरकिनार कर धार्मिक कार्यक्रमों पर अपनी जकड़न मज़बूत कर ली है. विसर्जन माँ सरस्वती की मूर्ति का हो या माँ दुर्गा की ट्रकों, ट्रैक्टरों पर मूर्तियों को ले जा रहे युवाओं की टोली को देख पाठक अंगुलि पर शराब के नशे में धुत्त लोगों की गिनती कर सकते हैं. इन जकड़नों ने धार्मिक उत्सवों पर इतनी मज़बूत पकड़ बना ली है कि आस्थावानों की आस्था दरक रही है.


अगर गौर किया जाये तो दिल्ली जैसे महानगरों में धार्मिक आयोजनों के दौरान रात-रात भर कर्णभेदी ध्वनियाँ आपको सुनायी दे जायेगी. ये ध्वनियाँ कानून की बंदिशों से बेपरवाह पाठकों के घरों की दीवारों की चीरती हुई उनके कानों के परदों को झकझोरने की कुव्वत रखते हैं. विसर्जन के दौरान या उससे पहले ‘कमर हिले ला हो, कमर हिले ला’ या ‘मुन्नी के बदनाम’ होने का ढिंढ़ोरा जोर-जोर से पीटा जाता है. हालांकि युवाओं की तेजी से बदलती रूचियों ने ‘हाई हील्स की गलतियों’ को स्वीकार उसे ‘टिक-टॉक’ करने का पूरा मौक़ा दिया है.


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ऐसे में अब इन धार्मिक आयोजनों को धार्मिक कहे जाने पर पुनर्विचार होना चाहिये. जहाँ तक गुजरात के उपर्युक्त आयोजन में सासंद पूनम बेन की मौजूदगी का सवाल है वहाँ भारतीयों को समझ लेना चाहिये कि ‘हाथ’ निष्प्राण हो चुका है, ‘कमल’ कीचड़ में ही खिलता है ‘हथौड़ा-हँसुया’ भोथरे हो चुके हैं और इन सबसे पहले हमारे समाज का एक बड़ा वर्ग मृतप्राय हो चुका है. प्राण अब भी शेष हैं!Next….


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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashokkumardubey के द्वारा
April 22, 2015

रुपया लुटाने वाले रुपया लुटाएंगे जिनके पास लुटाने को रुपया है वही तो लुटाएंगे अगर वे किसानों की मदद के लिए आगे आएंगे तो क्या किसान उनको वैसा आनंद दे पायेगा, यह सब आनंद का मामला है इसके साथ कोई कमपरमाईज नहीं किया जा सकता .

मनीष किमोठी के द्वारा
April 20, 2015

इन चैनेल वालो को क्या सौराष्ट्र की परम्परा का जरा भी ज्ञान नही है ? ये नोयडा के कोठो में बैठे अपने लोकल चिंटू, पिंटू, राजू, सोनू, मोनू, टाइप के संवाददाताओ से क्यों नही जानकारी लेते कि ये परम्परा आखिर क्या है ? मित्रो, कई सौ साल पहले से गुजरात में कच्छ और सौराष्ट्र में हर साल गर्मी में बहुत सुखा पड़ता था. . तब लोग गायो, जानवरों आदि के चारे के लिए गाँव के चौबारे पर लोकसंगीत का आयोजन करते थे. . जिसे “डायरो” कहते है | जिसमे लोग अपनी हैसियत के अनुसार पैसे देते थे | इसमें पैसे लुटाकर देने की परम्परा है ताकि दुसरे देखकर भी प्रेरित होकर पैसे दे | फिर उस पैसे से जानवरों के लिए पानी चारा आदि का इंतजाम किया जाता था | सबसे अच्छी बात ये की गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ में ये परम्परा आज भी बदस्तूर चली आ रही है | आज भी सौराष्ट्र में जब भी कही डायरा होता है तो लोग उसमे उमड़ पड़ते है और खूब पैसे देते है | ये पैसे आज भी गाँवों में मन्दिर बनाने, जानवरों के लिए चारा आदि पवित्र कार्यों के लिए ही इस्तेमाल होता है |

rameshagarwal के द्वारा
April 20, 2015

जय श्री राम  बीजेपी की निंदा करना आज कल के बुध्जीविओं का धर्म बन गया केवल हिन्दुओ के बारे में ही सब गलतियाँ दिखाई पड़ती परन्तु और अन्य जगह कहने से दर लगता.आधा सत्य बताने में मज़ा आता हो.उस ३ करोड़ से लडकियों के हॉस्टल और दुसरे सामाजिक कार्यो में कर्च किया जाता.ऐसे लेखको ने कभी जा कर कास्ट नहीं उठाया की वनवासी क्षेत्रो में जा कर देखे कितना कार्य हो रहा कितनी गो शालाये संचारित होती है.कृपा अर्ध सत्य न लिक्खे.


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