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जब कॉल सेंटर का शौचालय हुआ जाम, निकले कई किलो कंडोम!

Posted On: 14 Apr, 2015 social issues में

Mukesh Kumar

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ठोस कचड़ा प्रबंधन के लिये बनाये गये कानून में पहली बार ‘सैनिटरी वेस्ट’ को परिभाषित किया गया है. इसमें डॉयपर्स, नैपकिन और कंडोम को शामिल किया गया है. परिभाषा के साथ ही इसके निष्पादन का खाक़ा खींचा गया है. सरकार का यह कदम जहाँ प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को पूरा करने की दिशा में अच्छा कदम साबित हो सकता है, वहीं कॉल सेंटर से कचड़ा उठाने वाले कर्मचारियों के लिये सिरदर्द बढ़ाने वाला साबित हो सकता है.


call-center

प्रतीकात्मक तस्वीर


भारत में जैसे-जैसे कॉल सेंटर फले-फूले वैसे-वैसे भारतीय युवाओं की जीवनशैली में बदलाव हुए. इन बदलावों ने केवल कार्यशैली और खान-पान को ही प्रभावित नहीं किया बल्कि सामाजिक परम्पराओं पर भी गहरा असर डाला. नोएडा, बेंगलुरू, हैदराबाद जैसे शहरों में तेजी से बढ़ रहे कॉल सेंटर में काम करने वाले अधिकांश युवाओं ने काम के कारण होने वाले मानसिक दबाव को दूर करने के लिये कुछ तरीके खोजे. ये तरीक़े सिगरेट के धुएँ का छल्ला बनाने से लेकर शराब और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े थे. अमेरिकी कार्यशैली को अंधाधुंध अपनाने वाले युवाओं ने अपना दबाव कम करने के लिये एक और तरीक़ा निकाला. यह तरीक़ा था आपसी सहमति के साथ शारीरिक संबंध स्थापित करने का.


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रात्रि-प्रहर में काम करने वाले युवक-युवतियाँ मानसिक दबाव की आड़ में शारीरिक संबंध स्थापित करते थे. इसके लिये कॉल सेंटर के शौचालय को महफ़ूज माना जाता था. इसके अलावा नजदीकी पार्क या पार्किंग क्षेत्र भी महफ़ूज जगहों की सूची में शामिल थे. हैदराबाद के एक कॉल सेंटर में शौचालय जाम होने पर उसे साफ करने आये कर्मचारियों ने वहाँ से कई किलो कंडोम निकाला. इसके बाद ही उस शौचालय का निकास मार्ग साफ हो सका.


कॉल सेंटर के उदय के वर्षों में हैदराबाद से निकलने वाले अख़बारों की सुर्खियों में उनके शौचालयों का ज़िक्र भी होता था. इस्तेमाल करने के बाद फेंके गये हजारों कंडोम के कारण शौचालयों के बाधित हुए निकास मार्ग की ख़बरें उन दिनों प्रमुखता से छपती थी. इसी बहाने बेंगलुरू के कॉल सेंटर हब के नाम से मशहूर एक प्रांत में सफाई कर्मचारियों की परेशानियाँ भी इन सुर्खियों का हिस्सा बन जाती थी. बेंगलुरू के इसी प्रांत में उस समय गर्भपात कराने वाली युवतियों की संख्या अचानक बढ़ गयी थी. हालांकि कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारियों में सब ऐसे नहीं थे लेकिन अधिकांश युवा इस पाश्चात्य कचड़े को ही आधुनिक जीवनशैली समझ बैठे थे.


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अब सरकार ने ‘ठोस कचड़ा प्रबंधन कानून’ को अंतिम रूप देने से पहले इसके लिये बनाये गये ड्रॉफ्ट में कंडोम और ऐसे कचड़ों के निष्पादन का ज़िक्र किया है. ऐसे में युवाओं के लिये यह जरूरी हो जाता है कि वो भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझते हुए विवाह पूर्व शारीरिक संबंध बनाने की अपनी स्वच्छंदता पर स्व-अंकुश लगाने की दिशा में बढ़ें. इससे उन सफाई कर्मचारियों की सिरदर्द कम हो सकती है जिन्हें कॉल सेंटर के शौचालयों के निकास मार्ग से हजारों कंडोम निकाल उसे साफ करना पड़ता था.Next…..


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UMGSA6S के द्वारा
April 16, 2015

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Vivek Kumar के द्वारा
April 15, 2015

i also want to join the call centre……

arif khan के द्वारा
April 15, 2015

Could not be written any better. Reading this post reminds me of my old room mate! He always kept talking about this. I will forward this post to him.

R J SINGH के द्वारा
April 15, 2015

HELLO SIR UP KE AAYODHEYA SE THODE DUR HAI EK PARSIYA GAO JEHA AAJ BHE LOG ANDHRE ME REHTA HAI,, KOI NAHI JANTA VEHA KI PROBLAM AAJ TAK BHAR NAHI AA PAYI HAI,,,,KOI HAI JO VEHA KI HELP KERAGA

ismail के द्वारा
April 15, 2015

modi zindabad wah ji modi ye ek accha kam tu kya


topic of the week



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