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सरकारी स्कूल के बच्चों को रोज मुफ्त में क्यों दूध पिलाता है यह किसान

Posted On: 21 Jan, 2015 Others में

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इस किसान की दरियादिली देखकर बड़े-बड़े पूंजीपतियों को भी शर्म आ सकती है. जहां बड़े-बड़े धन्ना सेठ समाजसेवा के नाम पर प्रतिकात्मक रूप से आगे नहीं बढ़ते और राई जितने कान को पहाड़ कहकर मीडिया में प्रचारित करवाते हैं वहां इस किसान की प्रतिबद्धता काबिल-ए-तारीफ लगती है. मेरठ के शामली जिले का यह किसान रोज 120 बच्चों को मुफ्त में दूध पिलाता है.


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रमेश चन्द्र नंबरदार नाम के इस किसान ने एक सरकारी प्राइमरी स्कूल के 10 दर्जन कुपोषित बच्चों को चिन्हित किया है और रोज उन्हें अपने घर से उबला हुआ दूध लाकर पिलाता है.  इस किसान की बच्चों को एक साल तक दूध पिलाने की योजना है. वे करीब एक हफ्ते से 25 लीटर उबला और चीनी मिला दूध इस स्कूल में पहुंचा रहे हैं. एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत करते हुए रमेश ने कहा, “मैं यह सुनकर बड़ा हुआ कि हमारे देश में दूध की नदियां बहती थीं. आज बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं. हाल ही में केंद्र सरकार ने हर एमपी के एक गांव को गोद लेने की योजना शुरू की तो मुझे लगा कि मैं भी बच्चों की मदद कर सकता हूं.”


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रमेश के अनुसार,  “कुछ लोग गर्म कपड़े बांटते हैं, कुछ किताबें बांटते हैं. मैं चाहता था कि बच्चे मजबूत बनें. मेरे पास सीमित साधन थे लेकिन मैंने बच्चों को दूध के साथ चना और चीनी देना शुरू किया. यह 120 बच्चों के लिए काफी है.”  बकौल रमेश उनके पास अच्छी नस्ल की गायें हैं जो रोजाना 45 लीटर दूध देती हैं. बच्चों के लिए रोज 25 लीटर दूध देने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती. उन्होंने अपनी ये सोच शामली के डीएम नरेंद्र प्रसाद सिंह से साझा किया था और डीएम ने भी रमेश का काफी उत्साहवर्धन किया.


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इस स्कूल के हेडमास्टर नीरज गोयल के अनुसार, “पहले तो हमें लगा कि रमेश खास मौकों, जैसे गणतंत्र दिवस पर बच्चों को दूध पिलाएंगे, लेकिन उन्होंने कहा कि वह रोज ऐसा करना चाहते हैं. हमें शक था कि वह रोज ऐसा कर पाएंगे, लेकिन वह लगातार स्कूल में दूध पहुंचा रहे हैं. दूध काफी अच्छी क्वॉलिटी का है. अगर ऐसे ही और लोग सामने आएं तो बच्चों का जीवन बदल सकता है.”


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आज के इस युग में जहां हर कोई अधिक से अधिक पैसा बनाने में जुटा हुआ है वहां रमेश की यह निस्वार्थ सेवा एक मिशाल है. Next..



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