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एक वेश्या की जिंदगी की दास्तां कोई नहीं सुनना चाहता लेकिन जो स्वप्ना के साथ हुआ उसे जान आपकी रूह कांप उठेगी

Posted On: 27 Nov, 2014 social issues में

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वेश्या… एक ऐसा नाम है जिसे शायद ही कोई सम्मान की नजर से देखता है. यदि इस नाम की कोई पहचान है तो केवल उसी स्थान पर जहां इसकी जरूरत पड़ती है. वेश्या को हर इंसान, साधारण तौर पर वो जो खुद को काफी शरीफ व अच्छे घराने का समझता है, वे सब दुत्कारते हैं. यह तो सब जानते हैं कि यह वेश्या किसी ना किसी मजबूरी से इस धंधे में आती है लेकिन एक वेश्या ऐसी भी है जिसकी आपबीती यदि आप जान लेंगे तो आखें नम हो जाएगी और सिर झुक जाएगा.


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स्वप्ना दास, 40 वर्षीय एक महिला, या यूं कहें एक वेश्या जो पिछले कई सालों से कोलकाता के सोनागाच्छी रेड लाइट एरिया (जहां वेश्या काम करती हैं) में काम करती है. सोनागाच्छी भारत का दूसरा सबसे प्रसिद्ध रेड लाइट एरिया है. वो यहां कब, कैसे, क्यों और किन हालातों में आई यह काफी दर्दनाक है.


स्वप्ना केवल 15 वर्ष की थी जब उसके पिता ने उसकी शादी कर दी. स्वप्ना का कहना है कि दूसरी लड़कियों की तरह वह भी स्कूल जाना चाहती थी लेकिन उसका यह सपना हमेशा के लिए सपना ही रह गया. उसके पिता की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी और यदि कोई कमाई होती भी तो उसके पिता द्वारा शराब व नशे में बहा दी जाती थी. उसकी आखिरी उम्मीद उसका पति था जिससे उसने यह आशा लगा रखी थी कि शायद अब उसे भुखमरी में नहीं रहना पड़ेगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं.


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स्वप्ना की शादी एक ऐसे इंसान से हुई जो उसके पिता की तरह ही नशे का आदि था. वो ना तो कोई काम करता था और ना ही स्वप्ना को खुश रखता था. यदि उसकी ओर से स्वप्ना के लिए कोई चाहत थी तो केवल स्वप्ना के पास जाना, साफ लफ्जों में कहें तो उसका शारीरिक शोषण करना. घर की बुरी अवस्था और कामजोर पति के व्यवहार को देख स्वप्ना ने घर से बाहर निकल कर काम करने का फैसला किया.


उसने पड़ोस के ही एक घर में साफ-सफाई का काम ढूंढ़ा. यह एक ऐसा घर था जहां एक पिता, उसका बेटा और बहू रहते थे. अभी कुछ ही दिन हुए थे कि घर के मर्दों ने स्वप्ना पर अपना हक जमाना शुरु कर दिया. घर के मर्द किसी ना किसी बहाने से स्वप्ना को छूते थे. कुछ समय बाद जब उन्हें समझ में आया कि स्वप्ना विरोध करने की हालत में नहीं है तो वे और भी निर्दयी हो गए. उन्होंने स्वप्ना का शारीरिक शोषण करना शुरु कर दिया.


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अब स्वप्ना बेहद मजबूर हो गई थी. वो ना तो काम छोड़ सकती थी और ना ही विरोध कर सकती थी. अंत में उसने एक बड़ा फैसला लिया. वो इस ‘जाल’ से बाहर निकलना चाहती थी और ऐसा करने में वो सफल भी हुई.


एक रात स्वप्ना दबे पांव कुछ छोटा-मोटा सामान उठाकर घर से भाग निकली. भागते-भागते वो गंगा किनारे पहुंची और थक हारकर वहीं सो गई. जब उसकी आंख खुली तो उसने अपने सामने एक आदमी को खड़ा हुआ पाया. स्वप्ना की हालत को देख उस आदमी ने उसके बारे में जानने की इच्छा जताई. भोली भाली स्वप्ना ने उसे सब कुछ बता दिया.


उस आदमी ने स्वप्ना की मदद करने की इच्छा व्यक्त की और उसे एक महिला के घर ले गया. स्वप्ना बताती हैं कि वो घर नहीं बल्कि एक ऐसी जगह थी जहां एक कमरे को नजाने कितने ही भागों में बांटा गया था. उसे लगा वो फिर से कहीं नौकरानी बनने आई है लेकिन सच्चाई कुछ और ही थी.


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कुछ देर आराम करने के बाद वहां मौजूद लोगों ने उसे तैयार हो कर बाहर दरवाजे पर खड़े होने के लिए कहा. तब उसे समझ में आया कि वो किसी साधारण महिला नहीं बल्कि एक वेश्या के घर में है जिसका घर भारत में स्थित दूसरे सबसे प्रसिद्ध रेड लाइट एरिया सोनागाच्छी, कोलकाता में है.


स्वप्ना यह जान कर दंग रह गई. वो रोई, चिल्लाई, उसने काफी मार भी खाई लेकिन इससे ज्यादा विरोध वो कर ना सकी और अंत में उसे उस दलदल में पैर रखना ही पड़ा जहां चाहकर भी कोई लड़की अपनी खुशी से आना नहीं चाहेगी.


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आज स्वप्ना के दो बेटे हैं, एक 15 वर्ष का और दूसरा 10 वर्ष का. स्वप्ना कहती है, “मेरे बेटे यह नहीं जानते कि उनके पिता कौन हैं, लेकिन वो इतना जरूर जानते हैं कि उनकी मां कौन है, और क्या काम करती है.” स्वप्ना अपने काम व इस अनचाहे जिंदगी की परछाईं अपने बच्चों पर नहीं पड़ने देना चाहती. वो चाहती है कि उसके बच्चे अच्छी शिक्षा ग्रहण करके अपनी जिंदगी में सफल बनें और यह महसूस कर सकें कि उन्हें सफल बनाने में उनकी मां ने कितनी मेहनत की है.


आज देशभर में स्वप्ना जैसी ना जाने कितनी ही औरते हैं जिन्हें पैसों के नाम पर रेड लाइट ऐरिया की शान बनाया जाता है लेकिन उनकी जिंदगी की शान किस चीज में है यह कोई नहीं पूछता. यदि हम गहराई से देखें तो हर वेश्या की कहानी में कुछ समानताएं हैं और वो हैं मजबूरी, पैसों की जरूरत या फिर अपनों से मिला हुआ धोखा. Next…


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swami chandermoli के द्वारा
November 29, 2014

सैकस वृकर को सम्मान के साथ मान्यता मिलनी चाहिये

eqbal के द्वारा
November 27, 2014

all prolems due to mobail so my sujetion don,t give cellohone to your wife for ceprat .and make common faimly for yuor sucses futere.


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