blogid : 316 postid : 790541

ना उड़ाया मजाक, ना दिया एक-दो का सिक्का, सीधे बना दिया भिखारी से टॉफी बाबा

Posted On: 29 Sep, 2014 Others,social issues में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

भारत में धार्मिक स्थलों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों में एक समानता है. इन सभी स्थानों पर हम सबको भिखारी जरूर नज़र आते हैं. फटे-पुराने मैले कपड़ों में भीख माँगते इन भिखारियों को कुछ लोग तरस से देखते हैं, कुछ एक-दो का सिक्का देने के लिए अपनी जेबें टटोलते हैं. एक-दो के कुछ सिक्कों को पा ये भिखारी अपने एक या दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर लेते हैं. परंतु, बिरले ही होते हैं जो भिखारियों को कुछ ऐसा दे देते हैं जिनसे उनका पूरा जीवन ही बदल जाता है.


toffeeimage



चेन्नई के एक स्कूल में पढ़ने वाले कक्षा 11 के 13 युवाओं का एक समूह अपने स्कूल के बाहर एक लड़के और लड़की को भीख माँगते देखता है. उन्हें बुरा लगता है. वो घर जाते हैं. अपनी दिनचर्या से समय निकाल वो सोचते हैं कि वो इन भिखारियों के लिए क्या कर सकते हैं. तभी उनमें से किसी एक के दिमाग में यह बात आती है कि क्यों ना इन भिखारियों के लिए कुछ किया जाए. वो ये बात समूह में बैठे सारे दोस्तों से कहता है. विचार पसंद आता है और निकल पड़ते हैं ये युवा समाज को एक नई दिशा देने. ये अपने मुहल्लों में घूमकर ऐसे भिखारियों को खोजते हैं जो मेहनत कर सम्मानपूर्वक जीना चाहते हैं. शहर के महापौर की सहायता से ये चिन्हित भिखारियों के खून की जाँच करवाते हैं ताकि यह पता चल सके कि वो नशेड़ी हैं या नहीं.



Read: “मुझे उसकी झुर्रियां बहुत पसंद हैं और हम एक-दूसरे के बहुत करीब भी हैं”, एक विचित्र प्रेमी जोड़े की अविश्वसनीय कहानी



ऐसे ही एक भिखारी थे आर. नागर जो पहले चेन्नई के पेरम्बूर में अयप्पन मंदिर के सामने भीख माँगते थे. वहीं इन्हें किसी मंदिर से खाना भी मिल जाता था. पर ये ज़िंदगी थी ज़िल्लतों की जिसे जीने को वो मजबूर थे. इसका कारण था उनके एक जानने वाले का धोखा, जिसने उनसे पैसे ठग कर उन्हें सब्जी वाले से भिखारी बना दिया था. तीन वर्षों से भीख माँगते इस 52 वर्षीय आदमी को ज़िल्लत भरी ऐसी ज़िंदगी मंजूर न थी, पर उनके लिए तो जैसे सूरज उगता ही नहीं था.



beggars image




उम्मीद की किरण तब जगी जब युवाओं के उस समूह ने नागर के लिए 2,500 रूपए जमा किए. उन्होंने एक अध्ययन टेबल की व्यवस्था की और उनसे अलग-अलग किस्म की कुछ टॉफी खरीदवाई. उस टेबल पर डब्बों में टॉफी रख आज ये भिखारी उन्हें बेचता है. बिक्री से मिले पैसों से वो सम्मानपूवर्क अपना जीवनयापन करता है.



Read: आप सोच सकते हैं कि हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार दिलीप कुमार जवानी में मिर्च का अचार बेचते थे!!



इस तरह से बच्चों के उस समूह ने उस इलाके में नागर जैसे 30 भिखारियों की पहचान की है जो  काम करना चाहते हैं. युवाओं के उस समूह की सदस्य एम. रौशनी कहती है कि वे ऐसे भिखारियों के लिए सुरक्षा गार्ड जैसी नौकरियाँ ढ़ूँढ़ रहे हैं. इस तरह से 13 लड़के-लड़कियों का ये समूह ‘’भिखारी मुक्त समाज’’ की अपनी परिकल्पना को वास्तविकता में बदल समाज को एक नई दिशा दे रहे हैं.  सच ही कहा है किसी कवि ने – माना कि, अँधेरा घना है, पर दीया जलाना कब मना है.



Read more:

यहां स्वयं देवता धरती को पाप से मुक्त करने के लिए ‘लाल बारिश’ करते हैं, जानिए भारत के कोने-कोने में बसे विचित्र स्थानों के बारे में

पहले शराब पिलाते हैं फिर इलाज करते हैं, क्या यहां मरीजों की मौत की तैयारी पहले ही कर ली जाती है?

कभी जूता बेचता था, आज यह कॉमेडियन फुटबॉल में पेले और माराडोना को भी टक्कर दे सकता है



Tags:                         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

HARISH TYAGI के द्वारा
September 30, 2014

बहुत अच्छा किया ..अगर हर शहर में ऐसा होने लगे तो गरीबी जरूर खत्म होगी .में इन सभी दोस्तों का धन्यबाद करता हु ..और अपने दोस्तों के साथ में भी प्रयास करूँगा

vinod के द्वारा
September 29, 2014

Gud jod i apreciate

shekhar burnwal के द्वारा
September 29, 2014

its really nice to have such a thinking to make a beggar free soceity,,,we should also appreciate these kinds of activity so that we will also contribute something to make that kind of soceity…

pankaj के द्वारा
September 29, 2014

good job dear i appreciate you and thanks for every one


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran