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क्या आप भी अपने बच्चे को क्रेच में छोड़कर ऑफिस जाते हैं? सावधान हो जाइए वहां उनके साथ ऐसा भी हो सकता है!!

Posted On: 31 Jul, 2014 social issues,Contest में

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उस दिन उन्होंने गलती यह कर दी कि रूम में लगे सीसीटीवी कैमरे बंद करना भूल गए. अब वे इसे अपनी एक छोटी सी भूल मानें या वहां आने वाले मासूम बच्चों और उनके मां-बाप की खुशकिस्मती, यह तो उनकी समझ पर निर्भर करता है. हर सुबह बच्चों की भलाई के लिए उन्हें छोड़कर आने वाले मां-बाप के लिए यह सच्चाई किसी सदमे से कम नहीं होगी. पछतावे और हताशा में शायद उन्हें खुद पर सच को न देख सकने की क्षमता पर गुस्सा आ रहा होगा पर हकीकत तो यह है कि वह ऐसा एकमात्र कमरा नहीं है, न ही उन कमरों की सच्चाई से अंजान वे अकेले ऐसे मां-बाप हैं. ऐसे हजारों कमरे हैं, उनके जैसे हजारों और मां-बाप हैं, जिन्हें उन कमरों की सच्चाई नहीं मालूम और वे अपने मासूम बच्चों को उन खतरनाक कमरों में छोड़ आते हैं. आखिर क्यों?



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रोमानिया के एक अनाधिकृत किंडरगार्डेन में बच्चों को पीटा जाता था. सुबह के समय जब मां-बाप बच्चों को वहां छोड़कर अपने-अपने काम पर जाते हैं तो बच्चों के रूम का सीसीटीवी कैमरा ऑन रहता था जबकि दोपहर होते-होते वे कैमरे ऑफ कर दिए जाते थे. यह बच्चों के सोने का वक्त होता है. पर इसके लिए कैमरा बंद करने की क्या जरूरत है? क्या कैमरा ऑन होने से बच्चे सोते नहीं? इस छोटे से सवाल का जवाब जानकर किसी भी मां-बाप की रूह कांप जाए!


उस किंडरगार्डेन में दोपहर के समय सीसीटीवी ऑफ करना एक रुटीन था. यह बच्चों के सोने से जुड़ा था. बच्चों को इन कैमरों से कोई परेशानी नहीं थी, परेशानी थी नर्सरी की केयर टेकर को क्योंकि सोने के लिए वह बच्चों को इस वक्त ‘रेड वाइन’ पिलाया करती थी. इसका कोई सबूत न रहे इसलिए इससे पहले कैमरे ऑफ कर दिया करती थी. एक दिन केयर टेकर कैमरा ऑफ करना भूल गई जिसकी फुटेज लीक होने पर मां-बाप ने नर्सरी पर मुकदमा दर्ज किया है.



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पेरेंट्स की ओर से केस लड़ रहे वकील का कहना है कि मात्र 5 साल तक के इन बच्चों को सुलाने के लिए उनके फ्रूट जूस में रेड वाइन मिलाई जाती थी. पेरेंट्स के आने के समय होने पर काफी देकर पहले उन्हें जगा दिया जाता था. यहां तक कि सोने या सोने के बाद उठने से इनकार करने पर बच्चों को जमीन पर बुरी तरह घसीटकर पीटते थे. कई बार बच्चों के शरीर पर चोट का निशान दिखने पर मां-बाप ने उनसे इसका कारण पूछा था पर बच्चों के आपस में खेलते हुए चोट लगने की बात कहकर वे इसे टाल दिया करते थे. सीसीटीवी कैमरे में एक जगह एक केयर टेकर बच्चे को धमकी देते हुए चिल्ला रही है कि नहीं सोने पर वह उसके सिर पर बुरी तरह मारेगी और बाहर ठंड में छोड़ आएगी. केस दर्ज होने के बावजूद कोस्टांटा के ‘ब्लैक सी सिटी में यह नर्सरी अभी तक चल रही है क्योंकि वहां के एक कानूनी प्रावधान के अनुसार जब तक जुर्म साबित नहीं हो जाता इसे बंद नहीं किया जा सकता.








कुछ लोग इस हकीकत से परिचित होंगे, कुछ जानकर हैरान होंगे. शायद वे एक बार खुद से ही पूछें कि क्या ये सच है? किंडरगार्डेन में बच्चों को सुलाने के लिए शराब…! मानें या न मानें लेकिन यह सौ फीसदी सच है और रोमानिया का एकमात्र यही नर्सरी नहीं है जो ऐसा करता है बल्कि पूरी दुनिया में ऐसे कई नर्सरी हैं जो बच्चों को सुलाने और उन्हें शांत रखने के लिए शराब और ड्रग्स का इस्तेमाल करते हैं. इसका बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर इतना बुरा असर होता है कि वे पागल भी हो सकते हैं.



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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के बाल और किशोर मनोरोग विभाग के अनुसार भी नर्सरी में ज्यादा वक्त बिताने वाले बच्चों में भावनात्मक और मानसिक विकृतियां होने की अधिक संभावना होती है. पर बड़े शहरों में कामकाजी मां-बाप के लिए जरूरतवश बच्चों को ऑफिस आवर तक नर्सरी में छोड़ने का चलन आज लगभग हर देश उच्च-मध्यम और मध्यम वर्ग के बीच का फैशन बन गया है. बच्चों के रख-रखाव के लिए वे एक बड़ी कीमत चुकाते हैं और मान लेते हैं कि भविष्य में आगे बढ़ने के लिए उनका बच्चा वहां तैयार हो रहा है. भारत समेत अधिकांश देशों में लगभग हर शहर के हर मोहल्ले में धड़ल्ले से नर्सरी खुले मिलेंगे. पर बच्चों की सुरक्षा और विकास के लिए आज यह सोच मां-बाप की मात्र एक भ्रांति साबित हो रही हैं.



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बच्चों को शांत रखने और सुलाने के लिए यहां शराब और ड्रग्स देने की कई शिकायतें सामने आ रही हैं. दिल्ली में ही ऐसे कई केसेस हैं. कई मामलों में इसकी वजह से बच्चों की दिमागी हालत इस हद तक बिगड़ गई कि मां-बाप को उनका इलाज कराना पड़ा और आज भी उनका इलाज चल रहा है. अंजाने में ही सही लेकिन ऐसे हालातों में मां-बाप ही एक प्रकार से बच्चों के दुश्मन बन जाते हैं. हालांकि वर्तमान समय में इन नर्सरी संस्थाओं की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता, सभी संस्थान ऐसे नहीं होते और बच्चों के विकास में उनका योगदान होता है इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन इसके लिए नर्सरी-संस्थान चुनने में अभिभावकों को सतर्क होने की जरूरत है.


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