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क्यों घट रही है संत समुदाय की विश्वसनीयता?

Posted On: 7 Feb, 2014 social issues में

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धर्म और आस्था से हमारे समाज का एक ऐसा जुड़ाव है जो आम बात न होकर सदियों से संवेदनशील भावनाओं से जुड़ा रहा है. हर धर्म और समुदाय अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए बेहद संवेदनशील होता है. इसमें गलत कुछ भी नहीं लेकिन आस्था और धर्म के नाम पर अंधविश्वास के घेरे में लाकर शोषण करने और शोषित होने की संभावना बनती है. ऐसा नहीं है कि यह अब तक केवल संभावना ही है इसलिए इसे नजरअंदाज किया जा सकता है बल्कि यह संभावना अब जमीनी हकीकत बनकर समाज की मान्यताओं और धार्मिक आस्था को चुनौतियां देने की स्थिति में पहुंच गई है. अगर यही हाल रहा तो संभव है अब तक संशय और संदेह जैसे शब्दों से परे रहा यह विश्वास कभी न जुड़ सकने वाले टूटे हुए स्नेह के धागे में परिवर्तित हो जाए. निश्चय ही यह समाज के लिए हानिकारक होगा.


बद्रीनाथ मंदिर के रावल (पुजारी) पर एक गर्भवती महिला के साथ बलात्कार का प्रयास करने का मामला सामने आया है. एक प्रतिष्ठित आस्था के केंद्र समुदाय से एक प्रतिष्ठित पुजारी का यह मामला संतों का वासना में लिप्तता से अलग ‘संतों का वासना की तृप्ति के लिए शोषण’ का मामला है. ज्यादा दिन नहीं गुजरे हैं जब प्रतिष्ठित संत आसाराम बापू गुरु को इसी आरोप में जेल की यात्रा करनी पड़ी है. आसाराम बापू पर भी आरोप है कि उन्होंने अपने भक्त की बेटी के साथ बलात्कार किया. इतना ही नहीं उनके धार्मिक प्रवचन के पीछे शोषण की कई और दास्तानों के तार भी जुड़े मिले. बद्रीनाथ के मुख्य पुजारी के ऊपर भी दिल्ली की एक महिला ने आरोप लगाया है कि शराब के नशे में धुत्त पुजारी ने उससे बदतमीजी की. महिला के अनुसार जब बद्रीनाथ के मुख्य पुजारी के दिल्ली में ही होटल में ठहरे होने की बात उसे पता चली तो आस्थावश उनसे मिलने गई. लेकिन उसके पहुंचने के बाद होटल के उस कमरे में मौजूद अन्य लोगों को बाहर जाने का इशारा कर दरवाजा अंदर से लॉक कर पुजारी उसके साथ गलत हरकतें करने लगा और किसी तरह बच-बचाकर वह निकलकर भाग सकी.


asaramएक नजर मामला यौन शोषण, महिलाओं को भोग वस्तु के रूप में देखे जाने और समाज में उसकी दयनीय दशा की है लेकिन दूसरे ही पल मामला हमारी अंध-भक्ति का भी है. किसी भी समुदाय में धर्म और आस्था के केंद्र में भगवान और अध्यात्म होता है. क्योंकि धर्म और अध्याम की गूढ़ बातें हर किसी को समझ नहीं आतीं इसलिए उसके सरलीकरण रूप से समाज को परिचित कराने का माध्यम हमेशा ऋषि-मुनि, साधु-संत, महात्मा आदि रहे हैं (हर धर्म में इनके रूप बदल जाते हैं किंतु पादरी, काजी आदि ऐसे ही माध्यम हैं). इन्हें धर्म, धार्मिक ग्रंथों, वेद और पुराण की समझ के साथ समाज को ज्ञानवान बनाने की जिम्मेदारी होती थी और ये उस जिम्मेदारी को बखूबी निभाते थे. यही वजह थी कि समाज में साधु-संत हमेशा विद्वान के रूप में पूजनीय रहे. बदलते स्वरूप के साथ इनका स्वरूप भी बदलता रहा और साधु-संतों के नाम पर ठगी के मामले प्रकाश में आने लगे. नास्तिक लोग साधु-वृत्ति को ढकोसला मानते हैं लेकिन असलियत यही है कि इस तरह समाज के अहम वर्ग को उपेक्षित नहीं किया जा सकता.

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आसाराम बापू और अब बद्रीनाथ के मुख्य पुजारी जैसे मामलों पर समाज को अपनी संवेदनशीलता की समीक्षा करने की जरूरत है. साधु के नाम पर ‘चमत्कारी’ रूप से सारी समस्याओं से मुक्ति पा लेने की सोच बदलनी होगी. विद्वता के केंद्र में अपनी बुद्धि के उपयोग की समझ को कायम रखने के लिए सजगता हर हाल में कायम रहनी चाहिए. हमें आदि काल और आधुनिक काल के फर्क को समझना होगा. कल साधु न सिर्फ साधु वरन् गुरुकुल के गुरु (शिक्षक) भी होते थे. वेद और धर्मग्रंथ हमारे ज्ञान की जरूरत थे और इनसे समाज को शिक्षित करना इनकी जिम्मेदारियों थीं. कुल मिलाकर आदि काल से ये साधु-संत ‘गुरु’ जो ‘भगवान का रूप’ माने जाते हैं, के कारण हमेशा वंदनीय और श्रद्धा के केंद्र में रहे. आज यह भाव बदलकर चमत्कारी व्यक्तित्व के रूप में प्रभावकारी होने लगा है. वस्तुत: ऐसा व्यक्तित्व साधु-महात्माओं का न होकर हाथों का खेल दिखाने वाले जादूगरों का रहा है किंतु दिनोंदिन परेशान होते समाज का बस चुटकियों में समस्याओं से मुक्त होने की भावना इस तरह दोहन का माध्यम बन रही है. एक प्रकार से यह व्यवसाय और भोग-विलास का माध्यम बनता जा रहा है. इसमें असली धार्मिक गुरु की महत्ता कहीं पीछे छूट गई है. इस प्रकार न केवल संत समुदाय की विश्वसनीयता घट रही है बल्कि वैदिक ज्ञान पर अविश्वास की स्थिति में समाज के आस्थाहीन हो जाने का डर भी है. यह स्थिति कहीं न कहीं सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों में ह्रास लाएगा. इसलिए बहुत जरूरी है कि समाज में आस्था और धर्म के वास्तविक रूप के प्रति सजगता आए और ऐसे मामलों को स्व-चेतना से रोका जाए.

इस नई चुनौती का सामना समाज को एक साथ करना होगा

गे एक्टिविटी पर सुप्रीम कोर्ट का तमाचा

विवादों में महिला आयोग

Web Title : latest women assault issue



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