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बीवी चाहिए लेकिन कुंवारी …..

पोस्टेड ओन: 19 Mar, 2013 में

आज भी डेटिंग का मतलब विकल्पों की तलाश करना ही है. जो बेस्ट है उसे चुनो लूजर को भूल जाओ. एक-दूसरे के लिए सीरियस होना या फिर बड़ी कसमें खाना पूरी तरह आउटडेटेड हो चुका है. आज तो बस वही सबसे बेस्ट है जो आपके साथ टाइम स्पेंड करे, घूमे-फिरे, सेक्स करे और फिर गुडबाय कहकर चला जाए, ना कि जबरन गले की फांस बन जाए



यह किसी फिल्म का डायलॉग नहीं बल्कि भारतीय युवाओं की एक बड़ी हकीकत है. यह बात किसी से भी छिपी नहीं है कि आज का युवा आधुनिकता की चकाचौंध में इस हद तक खो चुका है कि उसे अपने अच्छे और बुरे से कोई सरोकार नहीं है. ग्लैमर और मॉडर्न लाइफस्टाइल के दीवाने हमारे युवा शारीरिक संबंधों की अहमियत और उसकी गरिमा से खुद को काफी दूर किए हुए हैं.



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एक दौर था जब विवाह से पहले किसी पराये पुरुष या महिला से बात करना तक पूरी तरह निषेध माना जाता था. लेकिन अब समय ने कुछ ऐसी करवट ली है कि अब सेक्स के लिए महिला-पुरुष के बीच जान-पहचान तक की जरूरत नहीं होती. कैजुअल सेक्स की यह अवधारणा आजकल हमारे युवा बखूबी समझते हैं और साथ ही इनका अनुसरण भी करते हैं.


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आज युवा कुछ समय की मौजमस्ती के लिए प्यार और भावनाओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं. उनके लिए शारीरिक संबंध उत्सुकता का एक ऐसा विषय है जिससे जुड़े हर पहलू को जानने समझने की ललक उनमें उम्र से पहले ही आ जाती है. पहले जहां प्रेम निवेदन करना भी सहज महसूस नहीं किया जाता था आज वहीं एक-दूसरे को छूना और शादी से पहले सेक्स कर लेना भी कोई खास महत्व नहीं रखता.


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हम हर बात पर विदेशी संस्कृति, विदेशी लोगों को दोष देते हैं जबकि आज यह हालत भारत के हर कोने में विद्यमान है, चाहे वह ग्रामीण क्षेत्र हो या फिर शहरी समुदाय, प्राय: हर जगह प्रेम और भावनाओं का स्थान शारीरिक जरूरतों ने हथिया लिया है. जिसके परिणामस्वरूप वन नाइट स्टैंड और कैजुअल सेक्स जैसे संबंधों का अस्तित्व प्रमुखता के साथ भारतीय समाज में अपनी जड़ें बनाने लगा है.



हैरानी की बात तो केवल युवा ही नहीं बल्कि उम्र के एक परिपक्व पड़ाव पर पहुंचने के बाद भी लोग ऐसी गलतियां दोहराते हैं. उन्हें लगता है कि कौन किसी के लिए आंसू बहाए, कौन बेवजह की परेशानियां मोल ले. अंतत: तो सभी का मकसद एक-दूसरे के साथ शारीरिक संबंध स्थापित करना ही होता है और जब यह बिना किसी कमिटमेंट के उन्हें हासिल हो रहा है तो इसमें बुराई ही क्या है. बस यही सोच रखते हुए वे लोग ऐसे संबंधों में पड़ जाते हैं जिनका ना कोई वर्तमान होता है और ना ही भविष्य. अगर कुछ होता है तो वह बस अपनी शारीरिक इच्छाओं को पूरा करने का स्वार्थ. उल्लेखनीय तथ्य यह है कि ऐसे संबंधों में कभी शालीन कही जाने वाली भारतीय महिलाएं भी बराबर रूप से दिलचस्पी ले रही हैं. अब पुरुष ही नहीं वरन् महिलाएं भी कैजुअल सेक्स की परिभाषा को ना सिर्फ समझ रही है बल्कि बेहिचक इनका अनुसरण भी कर रही हैं.


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लेकिन हैरानी है तो बस इस बात की कि इतना सब कुछ होने के बाद भी लगभग 65 प्रतिशत अविवाहित लोग अपने लिए कुंवारी पत्नी की चाह लिए बैठे हैं.



शराब के नशे में कब तक बिकती रहेंगी बेटियां

सियासत पर भारी ‘सेक्स’

यहां अतिथियों का सम्मान नहीं बलात्कार होता है !!


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